1992 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रतिपादित उच्च शिक्षा 
पुनर्संशोधित राष्ट्रीय शिक्षा नीति -1992 या जनार्दन रेड्डी समिति -1992 जुलाई 1991 में , केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार तथा परिषद ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति समिति की नियुक्ति आन्ध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय जनार्दन रेड्डी की अध्यक्षता में नियुक्त की । इस समिति में विभिन्न राज्यों के छ : शिक्षा मंत्री तथा आठ शिक्षण शास्त्री थे । इस समिति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 एवं आचार्य राममूर्ति समिति 1990 के संदर्भ में पुनर्विचार कर अपने आख्या तथा कार्य योजना प्रस्तुत की । इस समिति ने अपनी रिपोर्ट जनवरी 1992 में प्रस्तुत की इस समिति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 की समीक्षा की तथा यह अनुभव किया कि इस नीति में बहुत मामूली संशोधन की आवश्यकता है । जनार्दन रेड्डी समिति ने यह अनुभव किया कि शिक्षा नीति में बहुत कम परिवर्तन को आवश्यकता है । अतः शिक्षा नीति की कार्य योजना में मामूली सा फेर बदल किया जा सकता । है । 5-6 मई 1992 को इस समिति ने अपनी रिपोर्ट केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार परिषद को परिषद ने इस रिपोर्ट पर अपनी सहमति प्रदान की और भारतीय संसद में इस समिति को सिफारिशों को क्रियान्वित करने का अश्वासन दिया । इस समिति ने 22 कार्यकारी दलं गठित किये । योजना आयोग की सदस्य डॉ . श्रीमती चित्रानायक की अध्यक्षता में एक परिचालन समिति ( Stering Committee ) का भी गठन किया ।
इस परिचालन समिति तथा कार्यकारी दलों का गठन इस प्रकार है कार्य - कार्यकारी अध्यक्ष
1 . नारी समानता के लिये शिक्षा - श्रीमती ऊषा पिल्लई
2. अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्ग - श्री बी.डी. शर्मा
3 . अल्पसंख्यकों की शिक्षा -श्री अजीज कुरैशी
4 . विकलांगों को शिक्षा - श्री यू.पी. सिंह
5 . प्रौढ़ एवं सतत शिक्षा -डॉ . रामलाल पारिख -
6. पूर्व बाल्यावस्था की देखभाल - सुश्री मीनाक्षी आनन्द चौधरी
7 . प्राथमिक शिक्षा - डॉ . जे . एस . राजपूत
8. माध्यमिक शिक्षा - डॉ . के भोपालन
9. नवोदय विद्यालय - श्री आर . के . सिन्हा
10. व्यावसायिक शिक्षा - डॉ . टी.वी. सुमंगल
11. उच्च शिक्षा - प्रोफेसर जी.एम. रेड्डी
12. युक्त शिक्षा - प्रो . वी.सी. कुलानन्दी स्वामी -
13. ग्रामीण विश्वविद्यालय / संस्थान - डॉ . एम . आराम
14. तकनीकी तथा प्रवन्धन शिक्षा - प्रो . एन.सी. निगम
15. अनुसंधान एवं विकास- -प्रो . सी . एन . आर . राव
16. शिक्षा तकनीकी तथा संचार - श्री वाई.एन. चतुर्वेदी
17. शिक्षा का डिग्री से पृथक्कीकरण तथा जनशक्ति नियोजन - - प्रो . एस . के . खन्नाबी
18. सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य एवं भाषा विकास - श्री अशोक वाजपेयी
19. खेल , शारीरिक शिक्षा तथा युवा - - श्री एस , वाई . कुरैशी
20. मूल्यांकन एवं परीक्षा. - प्रो . पी . एन . श्रीवास्तव
21. शिक्षक एवं शिक्षक प्रशिक्षण - -डॉ . के . गोपालन
22. शैक्षिक प्रबन्धन - - - श्री पी.के. उमाशंकर
संशोधित कार्य योजना
1992 जनार्दन रेड्डी समिति द्वारा गठित कार्यदलों ने गहन मंथन करके राष्ट्रीय शिक्षा नीति की कार्ययोजना में इन विषयों को सम्मिलित किया ।
1. नारी समानता के लिये शिक्षा - नारी शिक्षा की समानता एक महत्त्वपूर्ण विषय है । शिक्षा में सामाजिक न्याय तथा समानता के लिये विभिन्न उपायों को अपनाया जाना आवश्यक है । 1991 में नारी साक्षरता का प्रतिशत 39.42 रहा , जबकि पुरुषों का प्रतिशत 63.86 था । महिला शिक्षकों का अनुपात भी ठीक नहीं है । शिक्षा व्यवस्था में क्षेत्रवाद बहुत है । इस दृष्टि से नारी शिक्षा के विकास के लिये ये उपाय बताये गये
( i ) वांछित शैक्षिक उपायों तथा उपादानों को अपनाया जाय ।
( ii ) शिक्षा को नारी जागृति का साधन बनाया जाय ।
( iii ) ग्रामीण क्षेत्र में नारी की शिक्षा तथा घरेलू काम के मध्य तालमेल हो ।
( iv ) ग्रामीण क्षेत्र में महिला शिक्षिकाओं की व्यवस्था हो उनकी सुरक्षा तथा आवास की व्यवस्था हो ।
( v ) 15-35 आयुवर्ग की महिलाओं के लिये सतत् शिक्षा तथा निरौपचारिक शिक्षा कार्यक्रम चलाया जाय ।
( vi ) शैक्षिक वातावरण के निर्माण के लिये प्रिन्ट तथा इलैक्ट्रोनिक साधनों का उपयोग हो ।
( vii ) केन्द्र तथा राज्य स्तर पर पाठ्यक्रम विकास , शिक्षक प्रशिक्षण तथा अनुसंधान की व्यवस्था हो ।
2. अनुसूचित जाति , जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्गों की शिक्षा - वर्तमान परिस्थितियों का विश्लेषण कर इस वर्ग की शिक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिये । अधिकतम नामांकन सुनिश्चित किया जाय तथा इन वर्गों के बालकों को प्रोत्साहन दिया जाये । शिक्षा केन्द्र साधनयुक्त हों । आपरेशन ब्लैक बोर्ड आन्दोलन जारी रखा जाय । शिक्षण का न्यूनतम स्तर निर्धारित हो । प्रौढ़ शिक्षा संस्थान प्रोत्साहन , शिक्षण प्रशिक्षण , अन्य पिछड़े वर्गों के लिये विशेष सुविधायें , क्रियान्वयन तथा मूल्यांकन आवश्यक है ।
3. अल्प संख्यकों की शिक्षा - वर्तमान स्थिति का विश्लेषण उनके विकास के 15 बिन्दुओं में से विन्दु 11 पर विशेष ध्यान दिया जाये । प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने के लिये . कोचिंग सेन्टर्स स्थापित हों । अल्पसंख्यक प्रधानाचार्यों , शिक्षकों तथा प्रबन्धकों के प्रशिक्षण के लिये एन.सी.ई.आर.टी. विशेष पाठ्यक्रम चलाये । छात्रवृत्तियों तथा अन्य प्रकार की सहायता की व्यवस्था हो । इन वर्गों के लिये यह सब व्यवस्था की जाय जिनका उल्लेख नारी समानता की शिक्षा के लिये किया गया है ।
4. विकलांगों की शिक्षा - विकलांगों की शिक्षा के लिये विभिन्न युक्तियों का निर्माण , विकलांगों की समेकित शिक्षा , विशेष विद्यालय , व्यावसायिक शिक्षा , शिक्षक प्रशिक्षण , शिक्षण शैक्षिक तथा व्यावसायिक मार्गदर्शन शिक्षण अभ्यास क्रम तथा प्रक्रिया , जन संचार क उपयोग तथा ब्रेल लिपि में शिक्षण सामग्री की आवश्यकता पर बल दिया गया है ।
5. प्रौद एवं सतत् शिक्षा - जन - शिक्षा अभिक्रम को प्रौदशिक्षा एवं सतत् शिक्षा के लिये अपनाना आवश्यक है । अन्य विभागों से सहयोग लिया जाना चाहिये । शैक्षिक त तकनीकी सहयोग , सतत् शिक्षा के विकास के लिये आवश्यक है ।
6. पूर्व बाल्यावस्था की देखभाल और शिक्षा - पूर्व बाल्यावस्था की शिक्षा के लिये समन्वित बाल विकास योजना , पूर्व बाल्यावस्था शिक्षा केन्द्र बालवाड़ी , पूर्व प्राथमिक शिक्ष विद्यालय , मातृ एवं शिशु कल्याण केन्द्र खोलने तथा इनके चलाने के लिये योग्य एवं दीक्षि कार्यकर्ताओं की भर्ती पर बल दिया है ।
7. प्राथमिक शिक्षा - निरौपचारिक शिक्षा को प्राथमिक शिक्षा वैकल्पिक साधन के क्रम में स्वीकार करना चाहिये । एन्सर्ट ( NCERT ) को कक्षा एक से बारह तक के पाठ्यक्रम संशोधित कर पाठ्य पुस्तकें तैयार करनी चाहियें , साथ ही सूक्ष्म नियोजन के लिये दिशा निर्देश दिये जाने चाहिये । प्राथमिक स्तर पर साक्षरता अभियोग , बस्ते के बोझ , न्यूनतम अधिगम स्तर अतिरिक्त विद्यालय खोलने पर बल दिया गया है ।
8. माध्यमिक शिक्षा - रेड्डी समिति के 10 + 2 + 3 शिक्षा प्रणाली के जारी रखने को सिफारिश की । राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की रचना विशिष्ट वर्गों की शिक्षा , माध्यमिक स्कूलों का विषय , सामान्य विद्यालयी संरचना ( 5 + 3 + 2 = 10 ) गुणात्मक शिक्षा आधुनिकीकरण पाठ्यक्रम पुनर्रचना पर बल दिया ।
9. नवोदय विद्यालय- प्रतिवर्ष 50 नये नवोदय विद्यालय खोले जायेंगे और प्रत्येक जिले में एक नवोदय विद्यालय हो ।
10. व्यावसायिक शिक्षा - विभिन्न स्तरों पर व्यावसायिक शिक्षा की व्यवस्था को जाय । शिशुक्षुत्व शिक्षण , प्रशिक्षण , पाठ्यक्रम , व्यावसायिक तथा शैक्षिक मार्गदर्शन , लड़कियो के लिये व्यावसायिक शिक्षा की सिफारिशें की गई ।
11. उच्च शिक्षा - उच्च शिक्षा के विकास के लिये राज्य उच्च शिक्षा परिषदों ( SCHE ) के गठन , प्रबन्धक सूचना जाली , नये कॉलेजों के कार्यक्रम करने विश्वविद्यालयो के मूलभूत ढंग से अधिकतम उपयोग साधनों से युक्त नये कालेज , प्रवेश , परिश्रम साधनों का एकत्रीकरण तथा उपयोग अन्तर्विश्वविद्यालय केन्द्र स्वावित्तपोषित एवं स्वायत्त संस्थाओं का विकास , शिक्षकों के स्तर में सुधार , विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा इग्नू में तालमेल पर बल दिया गया ।
12. मुक्त शिक्षा - मुक्त शिक्षा के विकास के लिये इग्नू द्वारा क्षेत्रों की पहचान तथा विकास , मुक्त अध्ययन के लिये इलेक्ट्रोनिक मीडिया के उपयोग , छात्रों की गतिशीलता तथा राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयों की स्थापना पर बल दिया गया है ।
13. उपाधि तथा रोजगार - कमेटी ने कुछ क्षेत्रों में उपाधि के रोजगार के लिये योग्यता के अनुबन्ध से हटाया है ।
14. युग्म विश्वविद्यालय तथा संस्थान - ग्रामीण विश्वविद्यालयों तथा संस्थानों को स्थापना पर बल दिया गया है ।
15. अनुसंधान एवं विकास – मुख्य समस्याओं की पहचान , उनके संबंधों तथा शोष कार्यक्रमों के परिपालन तथा संचालन पर समिति ने बल दिया है ।
16. सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य प्राथमिक स्तर पर संस्कृति प्रवेशिक ( Culture Primary ) आरम्भ हो । बालनाट्य आन्दोलन को आरम्भ किया जाय । माध्यमिक स्तर पर सांस्कृतिक विरासत से परिचय कराया जाय । विश्वविद्यालय पर संगीत ललित कला प्रदर्शन कला तथा अनुवाद आदि के पाठ्यक्रम चलाये जायें ।
17. भाषा विकास - त्रिभाषा सूत्र , भाषा कौशल , हिन्दी शिक्षकों की नियुक्ति , विश्वविद्यालयों में आदर्श मूलक सुविधायें , संविधान की धारा 351 का अनुपालन तथा राष्ट्रीय स्तर के भाषा संस्थान के विकास पर बल दिया गया है ।
18. संप्रेषण एवं शिक्षा तकनीकी विश्वविद्यालयों , महाविद्यालयों तथा विद्यालयों में कम्प्यूटर्स की व्यवस्था तथा शिक्षा हो ।
19. खेल , शारीरिक शिक्षा तथा युवा- प्रत्येक विद्यालय में 45 मिनट की योग शिक्षा हो , खेलकूद की व्यवस्था हो । नेहरू युग केन्द्र , राष्ट्रीय सेवा योजना , स्काउट गाइड राष्ट्रीय कैडेट कोर आदि कार्यक्रम चलते रहने चाहिये ।
20. मूल्यांकन एवं परीक्षण सुधार- प्राथमिक स्तर पर प्रधान एवं सतत् मूल्यांकन होना चाहिये । स्कूलों के लिये एन्सर्ट ( NCERT ) आदर्श मूल्यांकन प्रस्तुत करने के लिए उच्च शिक्षा में प्रवेश परीक्षण हों , राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय मूल्यांकन संगठन हो ।
21. शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र द्वारा प्रस्ताविक शिक्षक प्रशिक्षण योजना का आरम्भ हो । राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद इस दिशा में पहल करें । विश्वविद्यालयों , महाविद्यालयों के शिक्षा के प्रशिक्षण विभागों को समुन्नत किया जाये । कम्प्यूटरों के उपयोग , शिक्षकों के दायित्व तथा शिक्षक संघों की प्रासंगिकता पर विचार प्रस्तुत किये जायें ।
22. शिक्षा और प्रबन्ध- शैक्षिक प्रबन्धक के लिये पंचायत राज , राज्य अधिनियम , जिला स्तरीय संस्थाओं , ग्राम शिक्षा कमेटियों और सरकारी संगठनों , राज्य एवं राष्ट्रीय शिक्षा सलाहकार परिषदों के योग , एजूकेशनल ट्रिव्यूनल आदि का गठन प्रभावशाली ढंग से किया जाये । जनार्दन रेड्डी समिति का मूल्यांकन
★ 1986 की शिक्षा नीति , वास्तव में दलगत राजनीति का शिकार होती रही । राममूर्ति समिति तथा जनार्दन रेड्डी समिति ने 1986 की शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं पर ही विचार किया और उन्हीं को पुन : प्रस्तुत कर दिया , इस कमेटी ने स्पष्ट कह दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में परिवर्तन करने की कोई आवश्यकता नहीं है । इस नीति को निष्ठापूर्वक लागू करने की । कमेटी में नौवीं पंच वर्षीय योजना तथा आगे भी कार्यकारी योजनाओं को लागू करने पर बल दिया ।