विशिष्ट बालकों पर क्रियात्मक अनुसन्धान ( Action Research on Exceptional Children ) . अथवा अथवा विशिष्ट बालकों पर क्रियात्मक अनुसन्धान कैसे किया जाय ? एक क्रियात्मक अनुसन्धान के प्रमुख चरण कौन - कौन से हैं ? क्रियात्मक अनुसन्धान क्या है ? यह परम्परागत शोध से कैसे भिन्न है ?

 

विशिष्ट बालकों पर क्रियात्मक अनुसन्धान ( Action Research on Exceptional Children )  . अथवा अथवा विशिष्ट बालकों पर क्रियात्मक अनुसन्धान कैसे किया जाय ? एक क्रियात्मक अनुसन्धान के प्रमुख चरण कौन - कौन से हैं ? क्रियात्मक अनुसन्धान क्या है ? यह परम्परागत शोध से कैसे भिन्न है ?

उदाहरणार्थ क्रियात्मक अनुसन्धान की एक योजना बनाइये । विशिष्ट बालकों पर क्रियात्मक अनुसन्धान की आवश्यकता पर बल दीजिए । एक क्रियात्मक शोध कैसे समस्या का चुनाव करके विशिष्ट बालक का समापन - उपचार कर सकता है ? अथवा परम्परागत अनुसन्धान क्रियात्मक शोध से कैसे भिन्न है ? क्रियात्मक अनुसन्धान की क्या विशेषताएँ है ? विशिष्ट बालकों हेतु एक क्रियात्मक अनुसन्धान की योजना बनाइये । विशिष्ट बालकों पर क्रियात्मक अनुसन्धान उत्तर ( Action Research on Exceptional Children ) है । विश्व के अनेक देशों में आज शोधों की भरमार आधुनिक युग अनुसंधान का है । मानवीय क्षेत्रों से जुड़ा एक क्षेत्र विशिष्ट बालक है , जिसमें प्रतिभाशाली से लेकर अक्षम बालकों तक पर क्रियात्मक शोध की आवश्यकता महसूस हुई है क्योंकि इसी के द्वारा हम मानवीय संवेदनाओं को अक्षम , अपंग व पिछड़े बालकों से जोड़ा पायेंगे । यदि ' आज ' को अनुसन्धान का युग कहा जाय तो अतिशयोक्ति न होगी । प्रत्येक क्षेत्र में अनुसन्धान हो रहे हैं । अनुसन्धान का तात्पर्य एक नवीन सत्य की स्थापना सेहै । रेडमैन ( Redman ) के अनुसार , एक नवीन ज्ञान को प्राप्त करने के लिए व्यवस्थित तथा सोद्देश्य प्रयास ही अनुसन्धान है । यदि यह प्रयास शिक्षा के क्षेत्र में किया जाता है तो वह शैक्षिक अनुसन्धान कहलाता है । शिक्षा का उद्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास करना है । इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आवश्यक है कि समय - समय पर शैक्षिक अनुसन्धान होते रहें । के शैक्षिक सिद्धान्तों और विधियों का प्रतिपादन करना है । ” विशिष्ट बालकों के समायोजन के • मुनरो ( Monroe ) के अनुसार , " शैक्षणिक अनुसन्धान का अन्तिम उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में लिये क्रियात्मक शोध की आवश्यकता हैं ।
विशिष्ट बालकों के लिये क्रियात्मक शोध की आवश्यकता ( 1 ) प्रतिभाशाली बालकों को सामान्य कक्षा में से अलग छाँटना ।
( 2 ) सीखने में धीमी गति वाले व पिछड़े वालकों को कक्षा में वर्गीकृत करना ।
( 3 ) मंदबुद्धि बालकों की रुचि व आवश्यकता के अनुसार उनकी शिक्षा व प्रशिक्षण की व्यवस्था करना ।
( 4 ) संवेगात्मक रूप से अशान्त , वंचित , कुसमायोजित बालकों की समस्याओं का अध्ययन कर उनको सही विद्यालय में प्रवेश व उसके लिये वैसे ही अध्यापक व शिक्षा की व्यवस्था करना ।
( 5 ) चिकित्सकों व मनोवैज्ञानिकों को अक्षम बालकों के सम्बन्ध में विस्तृत अध्ययन करवाना , जिससे उनकी सही चिकित्सा की जा सके ।
( 6 ) सम्मावित समाधानों को प्राप्त करने के ढंगों पर विचार ,
( 7 ) उपयुक्त शब्दों का प्रयोग । तथ्यों का संग्रह ( Collection of Data ) - विशिष्ट बालकों की समस्या से सम्बन्धित समस्त तथ्यों का संग्रह अनिवार्य है ।

ये तथ्य निम्नलिखित उपकरणों की सहायता से संग्रहित किये जा सकते हैं ( अ ) प्रश्नावली , ( इ ) चेकलिस्ट , ( आ ) अनुसूची , ( ई ) निर्धारण मापनी , ( उ ) निरीक्षण ( ऊ ) समाजमिति , ( ए ) मनोवैज्ञानिक परीक्षण , ( ऐ ) मनोविश्लेषणवादी विधियाँ ।

( iv ) तथ्यों का विश्लेषण ( Analysis Data ) - तथ्यों को संग्रहित करने के उपरान्त उनका विभिन्न प्रकार से सांख्यिकी प्रविधियों द्वारा विश्लेषण करना चाहिए । इससे जो परिणाम प्राप्त हों , उनको दूर करने के उपाय सोचने चाहिए ।

( v ) उपायों का क्रियान्वयन - समस्या समाधान के जो उपाय समक्ष आते हैं , उनका तुरन्त क्रियान्वयन करना चाहिए । तत्पश्चात् यह देखना चाहिए कि कितने विशिष्ट बालक किस सीमा तक लाभान्वित हुए हैं । अनुसन्धान के इन परिणामों को शैक्षिक पत्रिका में छपवाना चाहिए ताकि किसी दूसरे विद्यालय के विशिष्ट वालकों के अध्यापक उन उपायों से लाभ उठा सकें । क्रियात्मक अनुसन्धान योजना बनाना विशिष्ट वालक नाना प्रकार के होते हैं । यहाँ पर , उदाहरणार्थ - अपराधी बालकों ( जिनको कक्षा में चोरी करने की आदत है ) के सुधार के लिए एक क्रियात्मक अनुसन्धान योजना ( Action Research Plan ) बनाने की विधि प्रस्तुत की जा रही है । चोरी की समस्या पर क्रियात्मक अनुसन्धान योजना विद्यालय का नाम- विद्यालय की छात्र संख्या 800 कक्षा -10 वीं , कक्षा छात्र संख्या 74 अनुसन्धानकर्ता- XYZ सहायक -3 अन्य अध्यापक अनुसन्धान की अवधि -1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक
( 1 ) समस्या की पृष्ठभूमि - विद्यालय खुलने के उपरान्त जुलाई से कक्षा 10 में बहुत अधिक चोरियाँ होती है । अक्सर कक्षा अध्यापक तथा प्रधानाचार्य के पास पुस्तकों , कलम , पैसे आदि चुराने की शिकायत आती है ।
( 2 ) समस्या पर विचार - विमर्श - विद्यालय के अध्यापक आपस में विचार - विमर्श करते हैं और यह निर्णय लेते हैं कि चोरी की समस्या के निराकरण के लिए एक क्रियात्मक अनुसन्धान योजना बनायी जाय । इसके लिए वे विभिन्न पुस्तकों का अध्ययन करके चोरी करने वाले अपराधी बालकों के विषय में ज्ञान प्राप्त करते हैं ।
( 3 ) समस्या का परिभाषीकरण - कक्षा 10 के चोरी करने वाले अपराधी बालकों की समस्या ।
( 4 ) समस्या के कारण - अध्यापक समस्या के सम्भावित कारणों को खोजने का प्रयत्न करते हैं । इसके लिए वे पुस्तकों का अध्ययन करते हैं , अध्यापक - गोष्ठी का आयोजन करके विचार - विमर्श करते हैं , छात्रों और उनके अभिभावकों से अनौपचारिक वार्ता करते हैं । इनसे निम्नलिखित कारण सामने आते हैं
( i ) असुरक्षा की भावना बालकों में चोरी के अपराध की प्रवृत्ति को जाग्रत करती है ।
( ii ) आर्थिक अभाव बालकों को चोरी के लिए प्रेरित करता है ।
( iii ) अत्यधिक प्यार तथा अनुचित माँगों का पूरा हो जाना वालक की एक बार की गयी चोरी को प्रोत्साहन देता है ।
( iv ) कठोर अनुशासन भावना ग्रन्थियों तथा समायोजन सम्बन्धी कठिनाइयों को उत्पन्न करता है ।
( v ) कुछ बालक साहस की भावना से प्रेरित होकर चोरी करते हैं ।
( vi ) कुछ बालक अपने सहयोगियों का अनुकरण करते हैं ।
( 5 ) कार्य प्रस्ताव- अनुसन्धानकर्त्ताओं को यह विश्वास है कि यदि बालकों को अधिक प्रतियोगी क्रियाएँ करायी जायँ , अभिभावकों से सम्पर्क स्थापित किया जाय तथा नैतिकता की शिक्षा दी जाय तो वे अपनी अपराधी प्रवृत्ति को छोड़ सकते हैं । अतः इस आधार पर वे एक उपकल्पना बनाते हैं ।
( 6 ) उपकल्पना - यदि छात्रों के अभिभावकों से मिला जाय , साहसपूर्ण प्रतियोगी खेलों की व्यवस्था की जाय और नैतिकता की शिक्षा दी जाय तो चोरी करने की अपराध मनोवृत्ति का अन्त हो जायेगा ।
( 7 ) विधियाँ - योजना में तथ्यों तथा प्रमाणों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न विधियों पर विचार किया जाता है और इन विधियों का प्रयोग करने का निर्णय लिया जाता है
( ii ) प्रश्नावली
( i ) साक्षात्कार
( iv ) व्यक्तित्व मापन के लिए
( iii ) मत संग्रह
( v ) बुद्धि मापन के लिए परीक्षण  इन विधियों के द्वारा बालकों के विचारों , माता - पिता तथा मित्रों के मतों तथा वालक की बुद्धि - लब्धि और व्यक्तित्व का पता लगता है । इन आँकड़ों से यह संकेत मिलता है कि बालकों के अपराधी बनने के वही कारण हैं जो कि अनुसन्धानकर्ताओं ने पहले सोचे थे । इन कारणों को दूर करने के लिए अध्यापक अपनी योजना क्रियान्वित करते हैं ।

( 8 ) योजना का क्रियान्वयन- ( 1 नवम्बर से 30 नवम्बर ) क्रम . सं . क्रिया विवरण समय 1 , 37 अभिभावकों से सम्पर्क | प्रतियोगी खेल कवड्डी का आयोजन 3 वादनों में नैतिक शिक्षा । 37 अभिभावकों से सम्पर्क | नवम्बर प्रथम सप्ताह । नवम्बर प्रथम सप्ताह नवम्बर प्रथम सप्ताह नवम्बर द्वितीय सप्ताह दौड़ प्रतियोगिता का प्रवन्ध । नवम्बर द्वितीय सप्ताह 3 वादनों में नैतिक शिक्षा नवम्बर द्वितीय सप्ताह नवम्बर तृतीय सप्ताह बालकों के पारिवारिक वातावरण में सुधार करने का प्रयत्न । नवम्बर तृतीय सप्ताह वालकों को शिक्षाप्रद सरस्वती यात्राओं पर ले जाना ।

9 विद्यालय में किसी बड़े व्यक्ति को नवम्बर तृतीय सप्ताह नैतिकता पर भाषण देने के लिए आमन्त्रित करना ।

10 . नवम्बर चतुर्थ सप्ताह अभिभावकों के एक परिसंवाद ( Seminar ) का आयोजन करना । फुटबॉल मैच का आयोजन ।
1 . नैतिकता पर बालकों से एक निबन्ध लिखवाना । नवम्बर चतुर्थ सप्ताह नवम्बर चतुर्थ सप्ताह
( 9 ) योजना के परिणाम- ( 1 ) चोरी करने वाले अपराधी बालक किसी वर्ग - विशेष के नहीं हैं । ( 2 ) अभिभावकों से सम्पर्क स्थापित करने पारिवारिक वातावरण को सुधारने , प्रतियोगी खेलों का आयोजन करने तथा नैतिकता की शिक्षा देने से अपराधी बालकों की संख्या में 85 % कमी हो गयी । शेष 15 % छात्रों द्वारा चोरी की अपराध मनोवृत्ति को छोड़ने के निम्नलिखित कारण हैं ( i ) अभिभावकों की अशिक्षा । ( ii ) अभिभावकों द्वारा व्यवहार परिवर्तन न करना । ( iii ) विस्तृत मनोवैज्ञानिक खेलों का अभाव ।

( 10 ) अनुसन्धान परिणामों की सूचना - क्रिया - अनुसन्धान की योजना तथा उससे प्राप्त परिणामों का प्रकाशन शैक्षिक पत्रिकाओं में किया जाय ताकि अन्य शिक्षा संस्थाएँ इससे लाभ उठा सकें । इसी प्रकार की क्रियात्मक अनुसन्धान योजनाएँ अन्य विशिष्ट बालुकों के लिए भी बनायी जा सकती हैं । इन योजनाओं से प्राप्त परिणामों को अवश्य लागू करना चाहिए । त विशिष्ट बालक शैक्षिक परिस्थितियों में अपना समायोजन कर अपना पूर्ण विकास कर सकें ।