विशिष्ट शिक्षा
विशिष्ट शिक्षा का अर्थ ( Meaning of Special Education ) विशिष्ट शिक्षा के स्वरूप की रचना प्रतिभाशाली बालकों की विशेष आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए बाधिताओं से सम्बन्धित सेवायें जैसे यातायात , चिकित्सा , मनोवैज्ञानिक निर्धारण , भौतिक , शारीरिक तथा व्यवसायिक प्रशिक्षण तथा परामर्श आदि की भी आवश्यकता होती है । विशिष्ट शिक्षा के क्षेत्र में उपरोक्त संसाधन आवश्यक है , जो शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने में सक्षम है । विशिष्ट शिक्षा - शिक्षण के रूप में ( Specia Education - as Teaching ) विशिष्ट शिक्षा के स्वरूप को ' कौन ' , ' क्या ' , ' कहाँ ' आदि जैसे शब्दों में देखा जा सकता है । विशिष्ट शिक्षा के अर्थ को विलक्षण बालकों की विशिष्ट आवश्यकता , योग्यता तथा अनेक व्यक्तिगत शिक्षा प्रणाली के रूप में देखा जा सकता है । विभिन्न कार्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ , शिक्षाविद , शिक्षक , मनोवैज्ञानिक , वाणी प्रशिक्षक , जन्तु वनस्पति विज्ञानी , चिकित्सा आदि प्रतिभाशाली बालकों की आवश्यकताओं के अनुरूप सहायता करने का उत्तरदायित्व रखते विशिष्ट शिक्षा को पाठ्यक्रम के आधार पर कई बार सामान्य शिक्षा से पृथक किया जाता है । जैसे ' क्या ' पढ़ाया जाता है । उदाहरणार्थ स्वयं सहायता में चातुर्य और निपुणता का शिक्षण , ' ब्रेल ' भाषा पढ़ने व लिखने का प्रशिक्षण दृष्टि बाधित बालकों के लिये पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण अंग है । विशिष्ट शिक्षा संस्थाओं में छात्रों को बांटे जाने वाले ज्ञान का स्वरूप सामान्य शिक्षा संस्थाओं द्वारा बांटे जाने वाले ज्ञान से भिन्न होता है क्योंकि विशिष्ट शिक्षा का पाठ्यक्रम वैयक्तिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए बनाया जाता है । ' कहाँ ' विशिष्ट शिक्षा का स्वरूप क्योंकि सामान्य शिक्षा से भिन्न है , इसलिये इसे सहजता से पहिचाना जा सकता है । जबकि सामान्य शिक्षा सामान्य कक्षों में होती है , विशिष्ट शिक्षा संसाधन युक्त कक्षों , विशेष शिक्षा संस्थाओं या आवासीय शिक्षण केन्द्रों में दी जाती है । ' कैसे ' विशिष्ट शिक्षा की शिक्षा पद्धति सामान्य शिक्षा की पद्धति से भिन्न है । इसलिये विशिष्ट शिक्षा को सरलता से पहिचाना जा सकता है । विशिष्ट शिक्षा के अन्तर्गत , शिक्षाविद छात्रों को समझने के लिये सांकेतिक भाषा का प्रयोग कर सकता हैं । अन्य क्षेत्र में शिक्षाविद मन्दबुद्धि छात्रों को शिक्षण हेतु कार्य विश्लेषण और कुशल प्रशिक्षण का प्रयोग कर सकते हैं । इसके अतिरिक्त अन्य विशिष्ट शिक्षक अधिगम - अयोग्य बालक की शिक्षा के लिये प्रक्रिया - प्रशिक्षण और विभिन्न ज्ञान या बहुमुखी संचालित प्रविधियों का प्रयोग कर सकते हैं ।
( 1 ) सुधार हेतु प्रयास ( Preventive Efforts ) -
( 2 ) सुधार हेतु कार्यक्रम ( Remedial Programs )
( 3 ) पूरक प्रयास ( Compensatory Efforts ) -
( 1 ) सुधार हेतु प्रयास ( Preventive Efforts ) - बालकों के गम्भीर रूप से बाधित होने पर सम्भव समस्या के स्वरूप को रखना ।
( 2 ) सुधार हेतु कार्यक्रम ( Remedial Programs ) - बालकों को शारीरिक दोष से शिक्षण या प्रशिक्षण के द्वारा छुटकारा दिया जा सकता है ।
( 3 ) पूरक प्रयास ( Compensatory Efforts ) - बालकों को शारीरिक वाधिता से उभरने के लिये नये साधन देने का प्रयास करना । विशिष्ट शिक्षा एक व्यवसाय है । प्रतिभाशाली बालकों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये विभिन्न प्रविधियों तथा साधनों की विशिष्ट शिक्षा उपलब्ध करती है । यह वैयक्तिक स्तर पर योजनाबद्ध की जाती है , क्रमबद्ध तथा व्यवस्थित रूप से लागू की जाती है और सावधानी पूर्वक प्रतिभाशाली बालकों के लिये अनुदेशनों का विकास विशिष्ट शिक्षा के द्वारा किया जाता है । जैसे प्रतिभाशाली वालकों की वर्तमान तथा भविष्य में सफलता ग्रहण करना विकसित अनुदेशनों के प्रभावी होने पर निर्भर करता है ।
विशिष्ट शिक्षा के उद्देश्य ( Objectives of Special Education )
उपयुक्त विशिष्ट शिक्षा तथा सामान्य शिक्षा के उद्देश्य समान होते हैं- जैसे बालकों को शिक्षा के माध्यम से मानवीय संसाधनों का उत्थान , देश का विकास , समाज का पुनर्गठन , नागरिक विकास , व्यवसायिक कार्य कुशलता आदि प्रदान करना । इन उद्देश्यों के अतिरिक्त विशिष्ट शिक्षा के कुछ निम्नलिखित विशेष उद्देश्य भी हैं
( 1 ) शारीरिक दोषयुक्त बालकों की विशेष आवश्यकताओं की पूर्व पहिचान तथा निर्धारण करना ।
( 2 ) शारीरिक दोष की दशा में इससे पहले कि वे गम्भीर स्थिति को प्राप्त हो , उनके रोकथाम के लिये पहले से ही उपाय करना । बालकों के सीखने की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कार्य करने की नवीन विधियों द्वारा बालकों को शिक्षा देना ।
( 3 ) शारीरिक वाघित वालकों के माता - पिताओं को निपुणता तथा कार्यकुशलताओं के बारे में समझाना तथा बालकों की उत्पन्न समस्याओं एवं कमियों के बारे में सुरक्षा तथा रोकथाम के उपाय करना ।
( 4 ) शारीरिक रूप से बाधित बालकों की शिक्षण समस्याओं की जानकारी देना तथा सुधार हेतु सामूहिक संगठन तैयार करना ।
( 5 ) शारीरिक रूप से बाधित वालकों का पुर्नवास करना ।
( 6 ) शिक्षा की राष्ट्रीय नीति ( National Policy of Eudcation - 1986-92 ) में स्वयं एवं जीवन यापन के आव्यूहों का क्रमबद्धता से निर्धारण करना ।
विशिष्ट शिक्षा के सिद्धान्त ( Principles of Special Education ) विशिष्ट शिक्षा निम्नलिखित सिद्धान्तों पर आधारित है
( 1 ) व्यक्तिगत भिन्नता दो प्रकार की होती हैं ( अ ) दो व्यक्तियों में अन्तर ( ब ) मनुष्य का स्वयं से भेद होना । दूसरे शब्दों में , कुछ छात्र अन्य छात्रों से अधिकंश गुणों में सर्वथा भिन्न होते हैं , जो शिक्षा की ओर विशेष झुकाव तथ रखते हैं । ऐसे छात्रों को विशेष शिक्षण आवश्यकता आवश्यकतायें विशिष्ट शिक्षा के माध्यम से पूरी करनी चाहियें ।
( 2 ) कोई भी निरस्त नहीं ( No one is Rejected ) - शारीरिक रूप से बाधित सभी • बालकों को निःशुल्क उपयुक्त शिक्षा मिलनी चाहिये । सामान्य शिक्षा संस्थाओं में किसी बालक को स्वीकार अथवा अस्वीकार करने का विकल्प किसी विद्यालय की व्यवस्था में नहीं है ।
( 3 ) अविभेदी शिक्षा ( Non - Derininatory Education ) -ऐसहे विद्यार्थियों की पहिचान करनी चाहिये जो विशिष्ट शिक्षा की आवश्यकता का अनुभव करते हैं जिससे उन्हें दी जाने वाली शिक्षा को उपयुक्त स्वरूप सुनिश्चित किया जा सके । प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत रूप से परीक्षा होनी चाहिये । इसके पश्चात् सभी छात्रों विशिष्ट शिक्षा के कार्यक्रम से रखा जाना चाहिये । समय - समय पर ऐसे बालकों की कठिनाइयों , समस्याओं तथा उनकी प्रगति का परीक्षण भी किया जाना चाहिये ।
( 4 ) वैयक्तिक शिक्षा कार्यक्रम ( Individualized Education Programmes ) — जिन विद्यार्थियों को विशिष्ट शिक्षा की आवश्यकता है उन्हें व्यक्तिगत शिक्षा कार्यक्रम या तो विशिष्ट कक्षाओं से दिया जाये या उनसे सम्बन्धित संसाधन युक्त कक्षों में इस प्रकार की शिक्षा उन बालकों की वर्तमान कार्य प्रणाली और विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिये । अभिक्रमित अनुदेशन को भी प्रयुक्त किया जा सकता है ।
( 5 ) नियंत्रित वातावरण ( Restrictive Environmnt ) - जहाँ तक सम्भव हो शारीरिक रूप से वाधित बालकों तथा सामान्य बालकों की शिक्षा एक ही कक्ष में साथ - साथ होनी चाहिये । यह कक्षा सामान्य हो सकती है । सामान्य कक्ष बाधित छात्रों को न्यूनतम विघ्न डालने वाला वातावरण प्रदान करता है ।
( 6 ) विशिष्ट प्रक्रिया ( Special Process ) - यह प्रक्रिया प्रदर्शित करती है कि शारीरिक रूप में बाधित बालकों की माता - पिताओं को विद्यालय की व्यवस्था का निर्धारण तथा विश्लेषण करने का पूर्ण अधिकार है जहाँ पर बालकों को उनकी आवश्यकतानुसार शिक्षा दी जा सके । यदि माता - पिता शिक्षण संस्था की कार्यप्रणाली से असन्तुष्ट हैं तो वह बालकों को उस संस्था से निकालकर किसी अन्य उपयुक्त शिक्षा संस्था में प्रवेश दिला सकते हैं । जहाँ पहली संस्था की अपेक्षा शिक्षा के कार्यक्रम उपयुक्त तथा बालकों की आवश्यकता के अनुरूप हों ।
( 7 ) माता - पिता का सहयोग ( Parental Participation ) - यदि शारीरिक रूप से बाधित बालकों के माता - पिता भी शिक्षण कार्यक्रमों में रुचि लेते हैं तो विशिष्ट शिक्षण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है