अधिगम असमर्थी बालकों की कक्षा का प्रबन्धन किस प्रकार किया जाना चाहिए ?

 अधिगम असमर्थी बालकों की कक्षा का प्रबन्धन किस प्रकार किया जाना चाहिए ?   



               अधिगम असमर्थी बालकों की कक्षा का प्रबन्धन ( Classroom Management of LD Children ) 23 विलियम और हाउन्सेल ( 1998 ) में अपने लेख अधिगम असमर्थी बालकों की शिक्ष आव्यूह में कहा है कि अधिकांश अधिगम असमर्थी बालक में शैक्षिक शक्ति सामान्य वालको उपलब्धियाँ प्राप्त करने के लिए उन्हें कुछ सहायता की आवश्यकता होती है । के समान होती है , परन्तु उनकी शक्तियाँ छुपी हुई होती हैं , जिन्हें उजागर करने के लिए तय E 1. शिक्षण आव्यूह ( Teaching Strategy ) - शारीरिक व मानसिक रूप से बाधित बालकों के अधिगम के लिए निम्नलिखित आव्यूह हैं

 ( 1 ) अधिगम असमर्थी बालकों के द्वारा सराहनीय कार्य अथवा सफलतापूर्वक किया गया कार्य के प्रति अध्यापक का एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है कि वह बालकों की सहायता को ह तथा उनका ध्यान दें । बालकों पर अधिगम असमर्थी का लेबल न चिपकाएँ , जो बालकों के मनोबल को बढ़ाने में सहायक होगा ।

 ( 2 ) प्रविधियों का प्रयोग करना लाभदायक है । कम्प्यूटर का यथासम्भव प्रयोग करन भी एक अच्छी ( सूझबूझ ) वुद्धिमानी का कार्य है । कम्प्यूटर का प्रयोग अधिगम असमय बालकों के इन्द्रिय ज्ञान हेतु महत्वपूर्ण सलाह देने में प्रोत्साहित करता है ।

 ( 3 ) अधिगम असमर्थी बालक विशेषतः दूरदर्शन तथा अन्य दृष्टि से सम्बन्धित वस्तुओं के ज्ञान को आसानी से ग्रहण करते हैं ।

 ( 4 ) संगीत की आवाज तथा चित्रों के माध्यम से अधिगम असमर्थी बालकों को शिक्षा में सजीवता लाई जा सकती है । 



2. शिक्षा कक्षा का संगठन ( Organisation of Classroom ) -अधिगम असमर्थी बालकों के अध्यापक को कक्षा के समय का निर्धारण कार्य के अनुरूप करना चाहिए । समय का निर्धारण कुछ इस प्रकार करना चाहिए कि कड़ी मेहनत करने वाले कार्यों को अधिक समय देकर आराम से किया जा सके । वालक कार्य को आनन्द के साथ चारों ओर घूम घूमकर कर सकें । अध्यापक को निम्नलिखित बातों का ध्यान करना चाहिए । बालकों के बैठने की व्यवस्था ( Seating Arrangement ) - अधिगम असमय बालकों की कक्षा में बैठने की व्यवस्था करते समय ध्यान रखना चाहिए ।

 ( 1 ) डेस्क एक स्थान पर गुच्छे के रूप में होने चाहिए अर्थात् दूर - दूर नहीं फैले होने चाहिए , जो बालकों के साथ विचार - विमर्श करने अथवा एक साथ मिलकर कार्य करने में सहायक होता है , जिससे अनुकरण कर सकें ।

 ( 2 ) बालकों के लिए नए शब्दों का शिक्षण करते समय शब्दों को बार - बार दोहरान चाहिए , जो उन्हें याद करने हैं । 

( 3 ) अध्यापक द्वारा वालकों को सौंपे जाने वाले कार्य की योजना वनानी चाहिए तथा उनके द्वारा किए जाने वाले मूल कार्यों पर बल देना चाहिए , जिससे बालकों के मस्तिष्क मे कार्य के प्रति किसी प्रकार का संशय न हो । 

( 4 ) धीरे - धीरे  पहले बालक से सीधे तथा सरल कार्य कराने चाहिए । इसके पश्चात् कठिन कार्यों को एक के बाद एक जोड़ते हुए आगे बढ़ना चाहिए । जैसे - जैसे विद्यालय का समय व्यतीत होता है , उसी के अनुरूप अधिगम असमर्थी बालकों को आसानी से संकीर्ण कार्य की ओर ले जाना चाहिए । 


3. आकलन आव्यूह ( Assessment Strategies ) - अधिगम असमर्थी बालकों के आकलन आव्यूह निम्नलिखित है अधिगम असमर्थी बालकों का आकलन करते समय , अध्यापक को कार्य स्पष्ट रूप से करना चाहिए तथा बालकों के शिक्षा से सम्बन्धित विशेषताओं के रूप , गुणों के आधार पर उनको परीक्षाफल के रूप में अंक देने चाहिए । बालकों की परीक्षा के लिए प्रश्न बनाते समय यह विशेष ध्यान रखना चाहिए कि बहु विकल्प प्रश्न में उपयुक्त उत्तर सुनिश्चित हों । अध्यापकों को शिक्षा कक्ष की मुख्य धारा को व्यक्तिगत स्तर पर बनाना होता है , जहाँ वैयक्तिक अन्तर स्वीकार किए जाते हैं तथा उनका मूल्य होता है । अध्यापक को चाहिए कि वह बालकों का मार्गदर्शन करें तथा बालकों के अधिगम को अपना व्यक्तिगत उत्तरदायित्व के रूप में स्वीकार करें । अध्यापकों को बालकों के मध्य सहयोगपूर्ण कार्य करना , बालकों की समस्याओं को हल करना तथा वालकों को स्वेच्छानुसार कार्य करने को बढ़ावा देना चाहिए । अध्यापकों को विशेष रूप से ध्यान रखना होता है ।

( 1 ) कक्षा के वातावरण के बारे में बालकों की अनुक्रिया को स्वीकार करना चाहिए । 

( 2 ) प्रत्येक बालक को प्रेरित करने के लिए बालकों को विभिन्न विकल्प देने चाहिए ।

 ( 3 ) छोटे - छोटे सामूहिक कार्यों को स्वनिर्भरता के आधार पर करने के लिए बालकों को प्रेरणा देनी चाहिए । 

( 4 ) विद्यार्थियों के कर्तव्यों , नियन्त्रण तथा उत्तरदायित्वों को बढ़ाएँ । 

( 5 ) औपचारिक तथा अनौपचारिक बैठक करें । 

( 6 ) प्रत्येक बालक की प्रगति जानने के लिए बालकों का मूल्यांकन तथा आकलन करें । 

सामान्य कक्षाओं में निम्नलिखित बातों को प्रयुक्त किया जाए ।

( 1 ) नियोजित कार्यक्रम को बचाया जाए अर्थात् न किया जाए । ( 2 ) उदासीन वालकों को मध्य में बैठाया जाए ।

 ( 3 ) साथियों के द्वारा पढ़ाने का उपयोग करें तथा अधिगम असमर्थी बालक को अध्यापन का कार्य करने को दिया जाए ।

 ( 4 ) पढ़ाए गए पाठ्यक्रम के अनुरूप गृह कार्य दिया जाए ।

 ( 5 ) बालकों के माता - पिता अथवा संरक्षकों के साथ घनिष्ठ सम्बन्ध होने चाहिए । 

( 6 ) बालकों की आवश्यकता के अनुसार कार्यक्रम बनाए जाएँ । 

( 7 ) कार्यों का विश्लेषण किया जाए तथा बालक को अधिगम हेतु एक क्रम का अनुसरण किया जाए ।