विशिष्ट वर्ग के बालकों हेतु शैक्षिक मूल्यांकन ( Educational Evaluation for Exceptional Children )
मूल्यांकन क्या है ? मूल्यांकन कितने प्रकार का होता है ? शिक्षण प्रक्रिया में मूल्यांकन का क्या स्थान है ? स्पष्ट कीजिए । सामाजिक विज्ञान में मूल्यांकन से आप क्या समझते हैं ? अच्छे मूल्यांकन की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए । अथवा शिक्षा में मूल्यांकन का क्या अर्थ एवं आवश्यकता है ? इसके विभिन्न प्रकारों का संक्षेप में वर्णन कीजिए । अथवा मूल्यांकन की विभिन्न अवधारणाओं एवं प्रकारों को बताइए । सामाजिक विज्ञान विषय में आप किस प्रकार मूल्यांकन को व्यवस्थित रूप से लागू कर सकते हैं ? अपने विचार लिखिये । अथवा मूल्यांकन को परिभाषित करते हुए सामाजिक विज्ञान शिक्षण में इसके महत्व की विवेचना कीजिए ।
मूल्यांकन का अर्थ ( Meaning of Evaluation ) साधारण अर्थों में कहा जा सकता है कि किसी वस्तु , उपलब्धि , प्रक्रिया आदि का मूल्य अंकित करना मूल्यांकन कहलाता है । शिक्षा में मूल्यांकन का प्रयोग वर्तमान शताब्दी की घटना है । “ शिक्षा में मूल्यांकन अभी एक नवीन धारण है । इसका ग्रीन व अन्य का कथन प्रयोग विद्यालय कार्यक्रम , पाठ्यक्रम , शैक्षिक सामग्री , शिक्षक एवं बालकों की जाँच के लिये किया जाता है । ” इसके द्वारा शिक्षण के उद्देश्यों , सीखने , अनुभवों तथा परीक्षणों में घनिष्ठ सम्बन्ध स्थापित किया जाता है । शिक्षण - सूत्र ( Teaching Session ) के द्वारा छात्रों की जो मासिक , त्रैमासिक , छमाही , वार्षिक परीक्षाएँ ली जाती हैं , उनके द्वारा वस्तुतः उनकी उपलब्धियों का मूल्यांकन किया जाता है । मूल्यांकन के वास्तविक अर्थ को स्पष्ट करने के लिये कुछ विद्वानों ने अपने विचारों को व्यक्त किया है , जिनका विवरण निम्नलिखित हैं
1. क्लार एवं स्टार , " मूल्यांकन वह निर्णय या विश्लेषण है , जो विद्यार्थी के कार्य से प्राप्त सूचनाओं से निकाला जाता है । "
2. डॉ . हिल , " पुरानी प्रणाली में परीक्षा समूचे पाठ्यक्रम तथा शिक्षण विधि को निर्देशित किया करती थी , जबकि नई प्रणाली में परीक्षा एवं शिक्षण दोनों विशिष्ट शिक्षण उद्देश्यों द्वारा निर्धारित किये जायेंगे । अतः इन्हीं पर समूची शिक्षा एवं मूल्यांकन निर्धारित होने चाहिए । "
3. सी.सी. रॉस , " मापन से भिन्न मूल्यांकन एक ऐसी जाँच प्रक्रिया है , जो प्राय : बच्चे के समूचे व्यक्तित्व तथा समूची शिक्षास्थिति की जाँच के लिये होती है । "
4. जेम्स एम . ली , “ मूल्यांकन विद्यालय , कक्षा तथा स्वयं द्वारा निर्धारित शैक्षिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के सम्बन्ध में छात्र की प्रगति की जाँच है । मूल्यांकन का मुख्य प्रयोजन छात्रों को सीखने की प्रक्रिया को अग्रसर एवं निर्देशित करना है । इस प्रकार मूल्यांकन एक नकारात्मक प्रक्रिया न होकर सकारात्मक प्रक्रिया है । "
5. वेस्ले , " मूल्यांकन एक समावेशित धारणा है , जो इच्छित परिणामों के गुण , महत्व तथा प्रभावशीलता का निर्णय करने के लिये समस्त प्रकार के प्रयासों एवं साधनों की ओर संकेत करता है । यह वस्तुगत प्रमाण तथा आत्मगत निरीक्षण का मिश्रण है । यह सम्पूर्ण एवं अन्तिम अनुमान है । यह नीतियों के रूप परिवर्तनों एवं भावी कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण एवं आवश्यक पथ - प्रदर्शक है । ”
( 6 ) जे.डब्ल्यू . राईटस्टोन , “ मूल्यांकन में व्यापक व्यक्तित्व से सम्बन्धित परिवर्तनों तथा शिक्षा कार्यक्रमों के मुख्य उद्देश्यों बल दिया जाता है । इसमें केवल विषय - वस्तु मूल्यांकन ही सम्मिलित नहीं बल्कि प्रवृत्तियों , रुचियों , आदर्शों , चिन्तन विधियों , काम की आदतों , तथा वैयक्तिक एवं सामाजिक समायोजन योग्यताओं का मूल्यांकन भी सम्मिलित है । "
मूल्यांकन के सोपान ( Steps of the Evaluation ) सामाजिक विज्ञान में मूल्यांकन के सोपानों निम्नांकित प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है ।
( 1 ) सामाजिक अध्ययन शिक्षण के उद्देश्यों का निर्धारण एवं परिश्रमीकरण करना एवं उन उद्देश्यों की प्राप्ति के सूचक आचरण परिवर्तनों का निश्चय ।
( 2 ) आचरण परिवर्तन ( Behavioural Change ) के लिये आवश्यक सीखने के अनुभवों ( Learning Experience ) का संचालन एवं संकलन करना ।
( 3 ) सीखने की प्रक्रिया की सफलता एवं सार्थकता की जाँच करने के लिये शुद्ध एवं विश्वसनीय मापक का निर्माण करना ।
( 4 ) विविध मापकों एवं मूल्यांकन विधियों की सहायता से छात्रों के विषय में प्राप्त सूचनाओं का एकत्रीकरण , आलेख पत्रों का संचयन एवं व्याख्या ।
अच्छे मूल्यांकन की विशेषताएँ ( Characteristics of a Good Evaluation ) किस प्रकार के मूल्यांकन को तर्कसंगत कहा जा सकता है ?
इस प्रश्न के उत्तर में यह कहा जा सकता है कि उस मूल्यांकन को तर्कसंगत कहा जा सकता है जिसमें कतिपय विशेषताएँ हों , जिनका विवरण निम्नांकित हैं
( 1 ) वैघता ( Validity )
( 2 ) विश्वसनीयता
( 3 ) ( Reliability ) नात्मकता
( ( Diagnosticity )
( 4 ) वस्तुनिष्ठता ( Objectivity )
( 5 ) समुचितवरण ( Comprehensiveness )
( 6 ) व्यावहारिकता ( Practicability )
1. वैघता ( Validity ) - मूल्यांकन में वैधता का गुण होना चाहिए । अर्थात् मूल्यांकन तकनीक से वही मापा जाना चाहिए जिसे मापने हेतु उसका उपयोग किया जा रहा है । मानी जाती है । किसी मूल्यांकन तकनीक में जितनी वैधता अधिक होती है वह तकनीक उतनी ही अच्छी
2. विश्वसनीयता ( Reliability ) - विश्वसनीयता का सामान्यतः अभिप्राय विश्वास से है । मूल्यांकन पर हमारा कितना विश्वास है ? यही उस मूल्यांकन की विश्वसनीयता है । यदि मूल्यांकन तकनीक विश्वसनीय है तो उस तकनीक का प्रयोग अलग - अलग व्यक्तियों द्वारा करने पर भी प्राप्त परिणाम समान ही आते हैं , परिणामों में अन्तर आने पर उसे विश्वसनीय नहीं कहा जा सकता है ।
3. निदानात्मकता ( Diagnosticity ) - एक अच्छे मूल्यांकन में निदानात्मकता का गुण भी पाया जाता है । मूल्यांकन द्वारा यह आसानी से पता लग जाता है कि शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में क्या - क्या कठिनाइयों है ? उदाहरण के लिये विद्यार्थी आसानी से सामाजिक अध्ययन विषय सम्बन्धी ज्ञान को हृदयंगम क्यों नहीं कर रहे हैं ? और निदान हाथ लग जाने के बाद उपचारात्मक ( Remedial ) कार्य आसानी से किया जाना सम्भव है ।
4. वस्तुनिष्ठता ( Objectivity ) - एक अच्छा मूल्यांकन वही है जिसमें वस्तुनिष्ठता का गुण हो । यदि किसी मूल्यांकन पर मूल्यांकनकर्ता एवं मूल्यांकन किये जाने वाले बालक या व्यक्ति की भावनाओं ( रुचि , लगाव , द्वेष पक्षपात एवं अन्य मानसिक क्रियाएँ ) का प्रभाव नहीं पड़ता है तो वह मूल्यांकन वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन की श्रेणी में आता है ।
5. समुचितवरण ( Comprehensiveness ) -अच्छी मूल्यांकन तकनीक वही है जिसका निर्माण किस प्रकार के उद्देश्यों की जाँच करने हेतु किया गया है , वह उन सभी प्रकार के उद्देश्यों की जांच अच्छी प्रकार से करने में सक्षम हो ।
6. व्यावहारिकता ( Practicability ) -जो मूल्यांकन तकनीक आसानी से उपयोग में लायी जा सकती है अर्थात् जिसको प्रयोग में आसानी से लाया जाना सम्भव है वह मूल्यांकन की व्यावहारिक तकनीक कहलाती है । इसे सामान्य जन उपयोग में लेकर मूल्यांकन कार्य को आसानी से कर सकता है । सामाजिक विज्ञान शिक्षण में मूल्यांकन का महत्व ( Importance of Evaluation in Social Science Teaching ) मूल्यांकन का सामाजिक विज्ञान अध्ययन अध्यापन प्रक्रिया में बड़ा महत्व है क्योंकि मूल्यांकन के द्वारा ही सामाजिक अध्ययन शिक्षक अपने शिक्षण में सुधार करता हुआ बालक के व्यवहार में परिवर्तन कर शिक्षा के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल होता है ।
संक्षेप में मूल्यांकन से होने वाले लाभों को निम्नांकित बिन्दुओं में बाँटकर अध्ययन किया जा सकता है
( 1 ) सीखने में सुधार ( Improvement in learning ) ( 2 ) शिक्षण में सुधार ( Improvement in teaching ) ( 3 ) उद्देश्यों की स्पष्टता ( Clarity of the objectives ) ( 4 ) पाठ्यक्रम में आवश्यक परिवर्तन ( Necessary changes incurriculum )
1. सीखने में सुधार ( Improvement in learning ) - मूल्यांकन के द्वारा हो यह पता लगाया जाता है कि बालक कहाँ तक सीखने में समर्थ रहा है तथा ऐसी कौन - कौन सो कठिनाइयाँ है जो कि सीखने के मार्ग में अवरोधक है ? यह ज्ञात होने पर उन अवरोधों को हटाया जा सकता है , जिससे विद्यार्थी की सीखने की गति में तीव्रता आना अपेक्षित है । वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के अन्तर्गत प्रत्येक कक्षा के लिये निर्धारित पाठ्यक्रम में से मूल्यांकन हेतु परीक्षा व्यवस्था की जाती है । उस परीक्षा में उत्तीर्ण बालक को अगली कक्षा में पढ़ने की स्वीकृति स्वत : ही प्राप्त हो जाती है और वह मूल्यांकन के द्वारा आगे बढ़ता जाता है ।
2. शिक्षण में सुधार ( Improvement in Teaching ) - मूल्यांकन के द्वारा हो किसी अध्यापक को यह ज्ञात होता है कि उसके द्वारा काम में लायी गयी शिक्षण - विधियाँ किस सीमा तक बालक को सिखाने में सफल रही है और यदि कोई शिक्षण - विधि अधिक उपयोगी सिद्ध नहीं हो रही है तो वह उसके स्थान पर दूसरी वांछित शिक्षण विधि का उपयोग कर सकता है । इस प्रकार वह आवश्यकतानुसार अपनी शिक्षण तकनीक में सुधार कर बालकों की सीखने की गति ( Learning pace ) में आशातीत वृद्धि कर एक सफल शिक्षक बनने की दिशा में अग्रसर हो सकता है ।
3. उद्देश्यों की स्पष्टता ( Clarity of the objectives ) - अध्ययन अध्यापन प्रक्रिया मुख्यतः पूर्व निर्धारित उद्देश्यों पर ही आधारित होती है , नियत उद्देश्यों की पूर्ति हेतु ही अध्यापक अध्यापन कार्य करता है और अध्यापन को प्रभावी बनाने हेतु वह विविध प्रकार की युक्तियों का उपयोग करता है । वह अपने कार्य में कहाँ तक सफल रहा है या वह पूर्व निर्धारित उद्देश्यों को किस सीमा तक प्राप्त करने में समर्थ रहा है ? इस तथ्य का पता मूल्यांकन द्वारा ही लगाना सम्भव है और वह उस आधार पर भविष्य में अपनी अध्यापन प्रक्रिया में वांछित परिवर्तन कर निर्धारित उद्देश्यों की शत - प्रतिशत प्राप्ति हेतु प्रयास कर सकता है ।
4. पाठ्यक्रम में आवश्यक परिवर्तन ( Necessary changes in curriculum ) - शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को सुचारू एवं व्यवस्थित रूप से चलाने के लिये पाठ्यक्रम का निर्माण किया जाता है । पाठ्यक्रम से जहाँ एक ओर अध्यापक को यह ज्ञात होता है कि उसे क्या पढ़ाना है वहीं दूसरी ओर बालक भी यह जान जाता है कि उसे क्या पढ़ना है ? पाठ्यक्रम को इस प्रकार से व्यवस्थित किया जाना चाहिए कि वह निर्धारित समय में पूरा किया जा सके । उससे आशा की जाती है कि वह बालक एवं समाज की आवश्यकतानुसार ही अध्ययन अध्यापन प्रक्रिया का निर्धारण करें । कोई पाठ्यक्रम कहाँ तक समाज तथा बालक की आवश्यकता एवं आकांक्षाओं को पूरा करने में सफल है ? इस बात होता है तो परिवर्तन किया जाता है । का पता मूल्यांकन द्वारा ही चलता है और यदि पाठ्यक्रम में परिवर्तन करना आवश्यक प्रतीत सामाजिक विज्ञान में मूल्यांकन के साधन ( Maans of Evaluation in Social Science ) विविध विद्वानों द्वारा मूल्यांकन के अलग - अलग साधन बताए गए हैं , परन्तुय दि वर्तमान समय में स्कूली शिक्षा के विविध स्तरों पर किये जाने वाले मूल्यांकन पर दृष्टि डालें तो पता चलता है कि वर्तमान समय में मूल्यांकन के साधन के रूप में परीक्षा व्यवस्था ( Examination - System ) का ही सहारा लिया जा रहा है । मूल्यांकन की प्रविधियाँ ( Evaluation Devices ( Techinques ) मूल्यांकन प्रविधि का अभिप्राय उस रीति से है , जिसके द्वारा हम बालक के ज्ञान और की प्रमुख प्रविधियों को संक्षेप में नीचे दिया जा रहा है व्यवहार में हुए परिवर्तनों तथा उसको व्यक्तिगत विशेषताओं का मूल्यांकन करते हैं ।
मूल्यांकन
1. निरीक्षण प्रविधि ( Observation Techniques ) - इसके द्वारा छात्रों के व्यवहार , क्रियाओं , संवेगात्मक एवं बौद्धिक परिपक्वता के सम्बन्ध में प्रमाण प्रदान किये जाते हैं ।
2. प्रश्नावली ( Questionnaire ) - छात्रों से उनकी स्वयं की रुचियों एवं अभिवृत्तियों के विकास से सम्बन्धित सूचनाएँ प्राप्त करने के लिये वह प्रविधि बहुत उपयोगी
3. साक्षात्कार ( Interview ) इसके द्वारा रुचियों के विकास , दृष्टिकोणों में हुए परिवर्तनों तथा विभिन्न व्यक्तिगत विशेषताओं की जाँच की जाती है ।
4. क्रम निर्धारण मान ( Rating Scale ) इस प्रविधि का प्रयोग उन विभिन्न परिस्थितियों या विशेषताओं का मूल्यांकन करने के लिये किया जाता है , जो विभिन्न मात्राओं में प्रस्तुत की जा सकती है । इसके द्वारा हम बालक की किसी विशेष क्षेत्र की कुशलताओं की जाँच , उस क्षेत्र में उसके व्यवहार की प्रगति को देखकर भी कर सकते हैं ।
5. अभिलेख ( Record ) - छात्रों की डायरियाँ , शिक्षकों द्वारा तैयार किये गये घटनावृत्त ( Anecdotal Records ) तथा संचित अभिलेख पत्र भी मूल्यांकन की महत्वपूर्ण सूचना एवं मत जानने का प्रमुख साधन हैं ।
6. पड़ताल - सूची ( Check List ) - पड़ताल सूची प्रश्नावली की भाँति व्यक्तिगत सूचना एवं मत जानने का प्रमुख साधन है ।
7. परीक्षा प्रविधि ( Examination Techniques ) –'Examination ' शब्द का उद्गम ‘ Examen ' नामक शब्द से हुआ है , जिसका अर्थ है - ' तराजू का पलड़ा ' ( Tongure of Balance ) ' सामान्यत : इस प्रविधि का प्रयोग ज्ञान या कार्य की व्यवस्थित जाँच के लिये किया जाता है , चाहे वह परीक्षा किसी वाह्य व्यक्ति द्वारा ली जाए ।
परीक्षा प्रविधि के निम्नलिखित रूप हैं
( i ) मौखिक परीक्षा ( Oral Examination ) - इस प्रविधि का प्रयोग पढ़ने की योग्यता , उच्चारण एवं सूचनाओं की जाँच तथा लिखित परीक्षाओं की पूर्ति के लिये किया जा सकता है । यह प्रविधि या रीति चारित्रिक रूप से वैयक्तिक होती है । इसके द्वारा बालकों के व्यक्तिगत गुणों एवं अवगुणों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है । इसमें छात्र परीक्षक के समक्ष प्रश्नों के उत्तर देता है , जिससे परीक्षक उसके आत्मविश्वास , अभिव्यंजना शक्ति आदि की जाँच कर लेता है ।
( ii ) प्रायोगिक परीक्षा ( Practical Examination ) - इसका प्रयोग प्रयोगात्मक विषयों - विज्ञान , हस्तकला , ड्राइंग , कृषि आदि में किया जाता है । इसमें बालक अपने कार्य का नमूना परीक्षक के समक्ष प्रस्तुत करता है ।
( iii ) लिखित परीक्षा ( Written Examination ) - सामान्यत : विद्यालयों में . परीक्षा के इस रूप का प्रचलन है । इसके अन्तर्गत कार्य - समर्पण ( Assignment ) , प्रतिवेदन लिखना , प्रश्नों के उत्तर लिखना एवं कागज - पेन्सिल परीक्षाएं ( Paper and Pencil Tests ) आती है । कागज - पेन्सिल परीक्षाएँ छात्रों की ज्ञान प्राप्ति एवं पाठ्य - वस्तु को संगठित तथा व्याख्या करने की योग्यता आदि की जाँच करने में बहुत उपयोगी है ।
लिखित परीक्षाओं के दो रूप हैं-
( अ ) निबन्धात्मक परीक्षण ( Essay Type Tests ) , ( ब ) वस्तुनिष्ठ परीक्षण ( Objective Type Tests ) अधिक प्रचलित हैं । -