दृष्टि बाधित बालकों की मुख्य समस्याएँ
दृष्टि बाधित बालकों की अनेक समस्याएँ होती हैं । जैसे- व्यावहारिक समस्याएं अधिगम की समस्याए , स्थानापन की समस्या , समाज में समायोजन की समस्या , कभी - कभी जीविकोपार्जन की समस्या भी होती है ।
यहाँ पर कुछ समस्याओं का विवरण दिया गया है
( 1 ) बुद्धि - लब्धि स्तर कम होना ( Poor Intelligence )
( 2 ) शैक्षिक मन्दिता ( Educationally Retardation )
( 3 ) मन्द वाणी विकास ( Slow Speech Development )
( 4 ) व्यक्तित्व विक्षिप्त होना ( Personality Disorder )
( 5 ) सामाजिक समायोजन की समस्याएँ ( Problem of Social Adjustment ) ।
इन समस्याओं का संक्षिप्त विवरण यहाँ पर दिया गया है
1. बुद्धि - लब्धि स्तर कम होना ( Poor Intelligence ) - शोध अध्ययनों से यह विदित हुआ कि दृष्टि बाधित बालकों का बुद्धि स्तर भी सामान्य से कम होता है । इसलिए समुचित वातावरण तथा अवसर खोजने में भी असमर्थ रहते हैं । बुद्धि परीक्षण पर यह अच्छा नहीं कर पाते हैं । अधिकांश बुद्धि परीक्षण से ज्ञान , अनुभव तथा सूचनाओं पर आधारित प्रश्न सामान्य से निम्न स्तर की होती है । 1 होते हैं , इसलिए इनका बुद्धि - लब्धि स्तर कम होता है । व्यावहारिक दृष्टि में इनकी कार्य शैली
2. शैक्षिक मन्दिता ( Educationally Retardation ) - दृष्टि बाधित बालक ब्रेल लिपि का उपयोग करने पर भी सामान्य वालकों से शैक्षिक उपलब्धि कम रहती है । दृष्टि बाधित बालक सामान्य बालक से एक या दो वर्ष मन्दित रहते हैं तथा शैक्षिक निष्पत्ति कम रहती है । यह वालक मन्द गति से तथ्यों तथा सूचनाओं को वोधगम्य कर पाते हैं क्योंकि यह अवलोकन नहीं कर सकते न ही अनुकरण कर सकते हैं । ज्ञान के श्रोत श्रव्य तथा स्पर्श इन्द्रियों तक सीमित रहते हैं । पढ़ने की गति मन्द होती है अनुदेशनात्मक प्रक्रिया में सम्बन्ध स्थापित नहीं कर पाते हैं ।
3. मन्द वाणी विकास ( Slow Speech Development ) - पूर्ण रूप से दृष्टि बाधित बालक वाणी की कला और कौशल का अनुकरण नहीं कर सकते हैं । जो उन्होंने सुना है उसी से वाणी का विकास होता है । वाणी का विकास सार्थक रूप में नहीं होता है । शोध अध्ययन स्पष्ट होता है कि शब्दों के उपयोग एवं उच्चारण में कठिनाई का अनुभव करते हैं ।
4. व्यक्तित्व विक्षिप्त होना ( Personality Disorder ) - व्यक्तित्व के विकास में वंशानुक्रम तथा वातावरण का विशेष महत्व तथा योगदान होता है । यह मनोवैज्ञानिक तथ्य है , जीवन के अनुभवों का इसमें सुधार होता रहता है । दृष्टि बाधित बालकों का समुचित वातावरण और जीवन के अनुभव से उनके व्यक्तित्व का विकास अपने ही प्रकार से होता है , जो पूर्णतः सामान्य बालकों से भिन्न प्रकार का होता है । इनके विकास में नाड़ी संस्थान , उनके अनुभव तथा मानसिकता का गहन प्रभाव होता है । इनमें असुरक्षा तथा विक्षिप्तता अधिक रहती है , जो व्यक्तित्व के विकास को प्रभावित करती है ।
5. सामाजिक समायोजन की समस्याएँ ( Problems of Social Adjustment ) - समाज में दृष्टि बाधितों को हेय दृष्टि से देखा जाता है क्योंकि वह समाज की सहायता चाहते हैं । इन्हें व्यक्तिगत तथा सामाजिक समस्याएँ रहती हैं । इनमें हीन भावना आ जाती है और समाज में समायोजन की कठिनाई भी आती है । मनोवैज्ञानिक इनके समायोजन की समस्याओं के सम्बन्ध में एक मत नहीं है । कुछ शोध अध्ययनों के निष्कर्ष हैं कि इस प्रकार के बालकों का विद्यालय में समायोजन नहीं होता है । अन्य शोध निष्कर्षों में पाया कि विद्यालय में इनका समायोजन उत्तम होता है । उनके साथी तथा सहयोगी पर्याप्त सहायता करते हैं ।
