विद्यालय प्रबन्ध ( School Management ) विद्यालय प्रबन्ध से क्या आशय है ? विद्यालय प्रबन्ध का महत्व तथा आवश्यकताएँ बताइये । What do you know about school management ? Describe its need and importance .
विद्यालय प्रबन्धन की अवधारणा ( Concept of School Management ) विद्यालय प्रबन्धन एक विशेष प्रक्रिया है जिसका कार्य विद्यालय के मानवीय तथा भौतिक संसाधनों को ऐसी गतिशील संगठित इकाइयों में परिवर्तित कर देना है जिनके द्वारा शैक्षिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु इस प्रकार कार्य किया जा सके कि छात्रों का सर्वांगीण विकास तथा जो कार्य कर रहे हैं , उनमें उच्च नैतिक स्तर बनाए रखते हुए उत्तरदायित्व निर्माण की भावना बनी रहे । एक समय था जब प्रबन्धन तानाशाही सिद्धान्तों पर आधारित था , परन्तु अब यह जनतान्त्रिक सिद्धान्तों पर आधारित है । प्रबन्ध में मानवीय सम्बन्धों पर विशेष बल दिया जाता है । विद्यालय प्रबन्धन शब्दावली का प्रयोग प्रथम बार वर्ष 1872 में किया गया । पुस्तक का शीर्षक था ' Practical Hand Book of School Management by Teachers ' . authored by Harding , परन्तु यह शब्दावली प्रचलित न हो पायी । अमेरिका में विद्यालय प्रबन्ध का प्रयोग 20 वीं शताब्दी के आरम्भ में हुआ तथा इंग्लैण्ड में वर्ष 1960 के आस - पास । भारतवर्ष में विद्यालय प्रबन्धन शब्दावली का प्रचलन 20 वीं शताब्दी के अन्तिम दशक में हुआ । भारत में प्राय : ' विद्यालय व्यवस्था ' , ' विद्यालय संगठन ' तथा ' विद्यालय प्रशासन शब्दावली का प्रयोग किया जाता रहा है । आज भी भारत के अनेक विश्वविद्यालय , बी.एड. के पाठ्यक्रम में इसी प्रकार की शब्दावली का प्रयोग करते हैं यद्यपि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ( University Grants Commission ) ने प्रबन्धन ( Management ) शब्द का प्रयोग किया है । वैसे मोटे तौर पर हम कह सकते हैं कि विद्यालय प्रबन्धन तथा विद्यालय फेर है । संगठन आदि के उद्देश्य , कार्यक्षेत्र तथा गतिविधियाँ एक जैसी ही हैं , केवल शब्दावली का हेर
1 . विद्यालय प्रबन्धन की विशेषताएँ विद्यालय प्रबन्धन उद्देश्यपूर्ण होता है । ( Characteristics of School Management )
2. विद्यालय प्रबन्धन समयानुसार बदलता रहता है ।
3. विद्यालय प्रबन्धन एक सामाजिक प्रक्रिया है ।
4. विद्यालय प्रबन्धन कला तथा विज्ञान दोनों है ।
5. विद्यालय प्रबन्धन एक जन्मजात तथा अर्जित प्रतिभा है ।
6 . विद्यालय प्रबन्धन एक व्यवसाय के रूप में भी है ।
7 . विद्यालय प्रबन्धन एक सामुदायिक उत्तरदायित्व के रूप मे है ।
8 . विद्यालय प्रबन्धन एक गतिशील प्रक्रिया है ।
9. विद्यालय प्रबन्धन का सम्बन्ध मानवीय तथा भौतिक संसाधनों के अधिकतम उपयोग से है ।
10. विद्यालय प्रबन्धन मानवीय पक्षों के विकास पर विशेष बल देता है ।
11. विद्यालय प्रबन्धन राष्ट्रीय दर्शन जो कि देश के संविधान में प्रदर्शित रहता है , उसके अनुकूल होता है ।
12. विद्यालय प्रबन्धन की सफलता में प्रभावशीलता तथा व्यावहारिकता का समावेश होता है ।
विद्यालय प्रबन्धन का महत्व तथा आवश्यकता ( Importance and Need for School Management )
वर्तमान स्थिति में विद्यालय प्रबन्ध का महत्व और आवश्यकता का अध्ययन हम निम्न महत्वपूर्ण तथ्यों के आधार पर कर सकते हैं
1. छात्र के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करने हेतु ।
2. शिक्षा की सम्पूर्ण प्रक्रिया को व्यक्ति और समाज दोनों के हित में संचालित करने हेतु ।
3 . शिक्षा की नीतियों और योजनाओं को निर्धारित तथा निर्मित करने , क्रियान्वित करने तथा उनका मूल्यांकन करने हेतु ।
4 . शिक्षा पर नियन्त्रण रखने तथा पर्यवेक्षण करने हेतु ।
5 . लोकतन्त्र को सुदृढ़ बनाने की दृष्टि से शिक्षा में लोकतान्त्रिक प्रवन्ध उत्पन्न करने हेतु ।
6 .मानवीय तथा भौतिक साधनों को समन्वयात्मक रूप में क्रियाशील बनाने हेतु ।
7.शिक्षा के निर्धारित उद्देश्यों , मूल्यों , आदर्शों , सिद्धान्तों आदि की प्राप्ति हेतु ।
8. शिक्षा में स्थायित्व और निश्चितता लाने हेतु ।
9. शिक्षा में व्याप्त अपव्यय एवं अवरोधन को दूर करने हेतु ।
10. शिक्षा में ' अवसरों एवं समानता ' के आधार पर भारत के प्रत्येक नागरिक को समान रूप से शिक्षा प्रदान करने हेतु ।
11. छात्रों तथा शिक्षकों दोनों की उपलब्धियों में वृद्धि करने हेतु ।
12. सामाजिक , आर्थिक , राजनीतिक , सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टि से बदलती हुई परिस्थितियों से शिक्षा , विद्यार्थी और शिक्षक को समायोजित करने हेतु । '
13. शिक्षा के कार्यों में कुशलता , सुगमता तथा सरलता उत्पन्न करने हेतु ।
14. शिक्षा से सम्बन्धित अधिकारियों , प्राचार्यों अथवा प्रधानाचार्यों तथा शिक्षकों को निर्देशन देने हेतु ।
15. सहानुभूति , सहयोग , परस्पर के निकट सम्पर्क को प्रोत्साहित करके स्वतन्त्र वातावरण में शिक्षा प्रदान करने हेतु ।
16. विद्यालय में वातावरण मनोवैज्ञानिक बनाने और साधनों , उपकरणों तथा आवश्यक सामग्री को उपलब्ध कराने हेतु ।
17. शिक्षा के विभिन्न स्तरों , पहलुओं तथा साधनों में समन्वय एवं समायोजन स्थापित करने हेतु । का प्रसार व प्रचार करने और विकास का मार्ग प्रशस्त करने हेतु ।
18. विद्यालय के पाठ्यक्रम को निर्धारित करने , उसे चलाने , शिक्षण की नवीन पद्धतियों
19. वैयक्तिक विभेद के सिद्धान्त के आधार पर शिक्षा की व्यवस्था करके विद्यार्थियों में सामाजिक निपुणता , आत्म - निर्भरता , व्यावसायिक कुशलता , समायोजन को क्षमता तथा आदर्श नागरिकता के गुणों का विकास करने हेतु ।
20. शिक्षा व्यवस्था अथवा संगठन के कार्य को सुगम बनाने हेतु ।