अधिगम असमर्थी बालकों के लिए शिक्षा की विधियों का वर्णन कीजिए ।
अधिगम असमर्थी बालकों के लिए शिक्षा की विधियाँ एवं प्रविधियाँ ( Teaching Methods and Techniques for LD Children ) यद्यपि ऐसे बालकों की शिक्षण हेतु अलग विधियाँ हैं , परन्तु कुछ अनुदेशन प्रविधियाँ सामान्य बालकों की शिक्षा के समान हैं अधिगम असमर्थी बालकों की शिक्षा हेतु निम्नलिखित प्रविधियाँ की संस्तुति की जाती है।
( 1 ) छोटी - छोटी बालकों को दिए जाने वाले सुझावों का प्रयोग करें । इनके अनुदेशनों का मुद्रण बड़ा होना चाहिए ।
( 2 ) भाषा का प्रयोग करें । संकेत के शब्दों को रंगीन बनाएँ ।
( 3 ) अनुदेशन अथवा पद जो बालकों को आप समझा रहे हैं , वे श्यामपट पर लिखें । मुख्य शब्दों को रेखांकित करें ।
( 4 ) प्रत्येक पद अथवा अनुदेशन के लिए अलग - अलग रंगों की चाक का प्रयोग करें ।
( 5 ) बालकों को अनुदेशन देते समय ध्वनि का स्तर ऊँचा करें ।
( 6 ) वालकों के अधिगम हेतु चित्रों का अधिक प्रयोग करें ।
( 7 ) पाठ के अन्त में , सम्पूर्ण पाठ में क्या - क्या बताया गया है ?
इसके बारे में बालकों को सारांश रूप में दोहरायें , बालकों से इसके सम्बन्ध में प्रश्न पूछे । बालकों से पठन सामग्री को पढ़ने , बोलने , याद करने के लिए कहें । क्योंकि अधिगम असमर्थी बालकों में क्रियात्मक कार्यों तथा उनके संगठन में कठिनाई अनुभव करते हैं । उन्हें बताया जाना चाहिए कि वे दैनिक जीवन में कार्यरत् रहें । भविष्य में होने वाली घटनाओं की सूची बनाओ , घटनाओं का कार्यक्रम बनाओ तथा समयानुसार कार्य योजना बनाओ । इसके पश्चात् एक सप्ताह के कार्यक्रम का विकास करना चाहिए । ऊँची कक्षा में पढ़ने वाले वालकों के किसी विशष्ट विषय की पढ़ाई अथवा कार्य से सम्बन्धित कार्यक्रम बनाना उपयोगी रहता है । बालकों का मार्गदर्शन करके सोचने में निपुणता का विकास किया जा सकता है । इसके लिए बालकों से पढ़ने , सुनने , ध्यान से देखने तथा विभिन्न वस्तुओं में भेद करने के लिए आँकड़े एकत्र कर सकते हैं तथा उन आँकड़ों में भिन्नता तथा समानता के आधार पर बालकों की सोचने की शक्ति का विकास सम्भव हो सकता है । इन भिन्नता में प्रगति के लिए अध्यापक द्वारा प्रश्न पूछने की प्रक्रिया का प्रयोग किया जा सकता है । वालकों को आंकड़ों को श्रेणीबद्ध करना तथा वर्गीकरण करने के लिए कहा जाए । इस स्तर पर करना महत्वूर्ण है । वालक को किसी दूसरे क्रम व आधार पर आँकड़ों को श्रेणी क्रम तथा वर्गीकरण करने के लिए कह सकते हैं । इस प्रकार बार - बार दोहराने की क्रिया बालक के पास एकत्र सूचनाओं तथा नए अनुभवों के लिए अतिआवश्यक है । इस प्रकार वालक में विभिन्न सूचनाओं तथा अनुभवों का एकीकरण सम्भव है । बालक को स्वयं के द्वारा सम्भावनाओं का पूर्व अनुमान करने को दिया जाए , जिससे वह उसके प्रभाव तथा उनके परिणाम भी समझ पाएगा । कुछ विशिष्ट प्रविधियों द्वारा वालक की स्मृति में भी विकास किया जा सकता है । दृष्टि तथा श्रवण के दोषों में बालक में सुधार किया जा सकता है । मुख के भावों से कुछ विशेष वस्तुओं को पुनः प्राप्त किया जा सकता है । बालक को रटने की आदत से बचाना जा सकती हैं चाहिए । सुनने तथा देखने से सम्बन्धित स्मृति में प्रगति लाने हेतु कुछ क्रिया बार - बार दोहराई •
( 1 ) बालक को संकट कालीन सेवाएँ उपलब्ध कराने वाले विभागों के फोन नम्बर तथा पते बार - बार दोहराने के लिए कहा जाए ।
( 2 ) शब्दों तथा लय के द्वारा बालकों को गाने सीखने के लिए कहा जाए ।
( 3 ) बालकों को ऐसे खेल खेलने के लिए कहें जिसमें एक बालक कुछ कहे , दूसरा बालक पहले बालक द्वारा बोले गए शब्दों को दोहराए तथा अपने कुछ शब्द और जोड़ दे । अपने जोड़ दें । तत्पश्चात् तीसरा वालक दोनों बालकों के द्वारा बोले गए शब्दों को दोहराए तथा कुछ शब्द
( 4 ) बालकों से सम्बन्धित विषयों पर कविता बनाने के लिए कहें ।
( 5 ) मौखिक दिशाएँ जो बालकों को शिक्षण के मध्य दी जाती हैं , बार - बार दोहराने के लिए कहें तथा सामूहिक अभ्यास भी कराया जाए । काट लेना चाहिए । इससे विद्यार्थी चित्रों को ध्यानपूर्वक देखेंगे तथा उनमें चित्रित वस्तुओं का
( 6 ) विद्यार्थियों को विभिन्न कार्टून चित्रों को देना चाहिए तथा उन चित्रों को अलग वर्णन करने को कहा जाए ।
( 7 ) विद्यार्थियों को समान शब्दों के आकार के बारे में बताना चाहिए ।
( 8 ) विद्यार्थियों को अनुक्रम को दोहराने के लिए कहना चाहिए ताकि उन्होंने जो पढ़ा है वह उसको समझ सके तथा क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत कर सकें ।
( 9 ) विद्यार्थियों को एक समय पर अधिक ईकाईयों का प्रयोग करने का अभ्यास कराना में चाहिए । उदाहरणार्थ , कुछ एक समय में विषय - वस्तु को लिखने का प्रयत्न करते हैं , अध्यापक को विद्यार्थियों के दृश्य उद्दीपन की लम्बाई जो लिखते समय उनके मस्तिष्क में रहती है , को बढ़ाने का प्रोत्साहन देना चाहिए ।
( 10 ) अध्यापक को विद्यार्थियों की आन्तरिक श्रव्यात्मक तथा दृश्यात्मक स्मृति के अभ्यास में सहायता करनी चाहिए , जब विद्यार्थी लिखित सूचनाओं का अनुवाद करते हैं उन्हें अक्षरों या शब्दों को बोलने के लिए कहना चाहिए ।
( 11 ) श्यामपट्ट पर विभिन्न रंग के चाक से अलग - अलग प्रश्न लिखने चाहिए । इससे विद्यार्थियों को उनका स्थान ढूँढने में सहायता मिलेगी ।
( 12 ) विद्यार्थियों को दूसरे विद्यार्थी के कार्य से नकल करने के लिए कहना चाहिए । कुछ विद्यार्थी अनुकरण करके अच्छा कार्य कर सकते हैं । अध्यापकों को शिक्षण प्रविधियों को प्रयोग करते समय प्रविधियों में परिवर्तन करते रहना चाहिए क्योंकि अधिगम बाधित वालकों में विषम विशेषताएँ होती हैं । इसके लिए निदानात्मक प्रारूप वाले आयामों का प्रयोग किया जा सकता है । विद्यार्थियों की आवश्यकताओं व योग्यताओं को ध्यान में रखते हुए पाठ्य योजनाओं का प्रयोग करना चाहिए ।
