अधिगम बाधित बालकों हेतु विभिन्न आयामों का वर्णन कीजिए । - अधिगम बाधित बालकों हेतु भाषा सम्बन्धी आयाम ( Linguistic Teaching Approach for LD )
अधिगम असमर्थी बालकों के लिए निम्नलिखित भाषा सम्बन्धी आयामों का प्रयोग किया जाता है ।
( 1 ) नाशिक ध्वनिक ( Nasal )
( 2 ) ध्वनिक ( Phonics )
( 3 ) भाषा सम्बन्धी ( Linguistic )
( 4 ) भाषा सम्बन्धी अनुभव ( Language Experiences )
( 5 ) अनुभिक्रमित अनुदेशन ( Programmed Instruction )
( 6 ) बहुइन्द्रीय ( Multi Sensory )
( 7 ) चित्रों की सहायता ( Audio - visual aids ) ,
भाषा प्रयोगशाला । उपरोक्त सभी का वर्णन यहाँ इस प्रकार से किया जा सकता है
( 1 ) नाशिक ध्वनिक प्रशिक्षण आयाम ( Nasal Teaching Approach ) अधिगम बाधित बालकों के सन्दर्भ में इस आयाम के लाभ तथा सीमाएँ होती हैं लाभ-
( 1 ) समझने में सरल
( 2 ) सीमित शब्दावली
( 3 ) निपुणता का वर्गीकरण में परिचय
( 4 ) निपुणता का पुनर्बलन
( 5 ) निदान तथा मूल्यांकन सामग्री उपलब्ध हो जाती है ।
सीमाएँ -
( 1 ) पाठ्य विधि में समिति लचीलापन
( 2 ) अनुदेशन को प्रोत्साहन नहीं दिया जाता ।
( 3 ) निपुणता के लिए आवश्यक सामग्री की कमी
( 4 ) प्रक्रियाओं के लिए साधनों की कमी
( 5 ) श्रव्य अनुदेशन के विश्लेषण तथा संश्लेषण को कोई पसन्द नहीं
( 6 ) उन्हीं कहानियों तथा विषयों के बार - बार दोहराने के कारण इस आयाम में अधिगम सफलता नहीं मिल पाती है ।
( 2 ) ध्वनियुक्त शिक्षण आयाम ( Phonic Teaching Approach ) अधिगम बाधित बालकों के सन्दर्भ में इस आयाम के निम्न लाभ तथा सीमाएँ हैं लाभ- यह अच्छी श्रव्यात्मक योग्यता वाले बालकों के लिए प्रभावशाली अर्थापन प्रविधि है ।
सीमाएँ -
( 1 ) श्रव्यात्मक क्षति वाले विद्यार्थियों के लिए प्रभावशाली नहीं है ।
( 2 ) पृथक् पढ़ाई की जा सकती है ।
( 3 ) समझाने की प्रक्रिया पर ध्यान नहीं दिया जाता है ।
( 4 ) अंग्रेजी भाषा में अक्षरों व शब्दों में समानता के कारण से भी भ्रम हो सकता है ।
( 3 ) भाषा सम्बन्धी शैक्षिक आयाम ( Linguistic Teaching Approach )
इस आयाम के लाभ व सीमाएँ निम्नलिखित हैं
( 1 ) प्रारम्भिक अवस्था में ही गलत वर्तनी पर नियन्त्रण हो जाता है ।
( 2 ) धीरे धीरे श्रव्यात्मकता का परिचय
( 3 ) बार - बार दोहराई तथा अभ्यास किया जाता है ।
सीमाएँ–
( 1 ) प्रारम्भ में समझने पर कम बल दिया जाता है ।
( 2 ) सामान्य वस्तु के लिए प्रयुक्त शब्दावली का लाभ विद्यार्थियों को शाब्दिक भाषा में नहीं हो पाता है ।
( 4 ) भाषा अनुभव शिक्षण आयाम ( Language Experience Teaching Approach )
अधिगम बाधित बालकों के सन्दर्भ में इस आयाम के लाभ तथा सीमाएँ होती हैं लाभ-
( 1 ) कहानियों से विद्यार्थियों को प्रेरणा मिलती है ।
( 2 ) मौखिक भाषा भी प्रयुक्त होते हैं ।
( 3 ) विशिष्ट निपुणता सम्बन्धी विकास सम्मिलित हो सकता है ।
( 4 ) भाषा व कला निपुणता का भी इस आयाम के द्वारा प्रयोग किया जा सकता है , तथा
( 5 ) अच्छी दृश्यात्मक योग्यता वाले विद्यार्थियों के लिए लाभकारी है । सीमाएँ–
( 1 ) विद्यार्थियों के भाषा स्तर से सीमित हो सकता है ।
( 2 ) निपुणता सम्बन्धं प्रारूप के लिए व्यवस्थित उपकरण को उपलब्ध नहीं किया जा सकता है ।
( 5 ) अभिक्रमित अनुदेशन शिक्षण आयाम ( Programmed Instruction ) अधिगम बाधित वालकों के सन्दर्भ में इस आयाम के लाभ तथा सीमाएँ होती हैं लाभ-
( 1 ) छोटे अनुक्रमीय पद ,
( 2 ) शीघ्र समझ में आ जाती है , तथा
( 3 ) सीधे अनुदेशन की कमी ,
तत्काल पुनर्बलन दिया जाता है ।
सीमाएँ -
( 1 ) प्रत्यक्ष अनुदेशन की कमी ,
( 2 ) प्रारूप की अनिश्चितता के कारण भ्रम हो सकता है ।
( 6 ) बहुइन्द्रीय शिक्षण आयाम ( Multisensory Teaching Approach ) अधिगम वाधित वालकों के लिए प्रयोग में आने वाली इस पद्धति के लाभ व सीमाएँ । निम्नलिखित हैं लाभ-
( 1 ) इस पद्धति के माध्यम से मस्तिष्क को सूचना पहुँचाने के लिए एक से अधिक इन्द्रियों का प्रयोग होता है तथा
( 2 ) इसके अन्तर्गत विश्लेषण तथा संश्लेषण पद्धति का प्रयोग किया जा सकता है ।
सीमाएँ-
( 1 ) कुछ कार्यक्रमों में अनुक्रमीय निपुणता विकास की कमी होती है , तथा
( 2 ) कुछ विद्यार्थियों पर अतिरिक्त इन्द्रिय बोझ पड़ता है ।
( 7 ) चित्रों उपयोग का शैक्षिक आयाम ( Review Picture Teaching Approach ) अधिगम बाधित बालकों के लिए प्रयुक्त इस पद्धति के लाभ और सीमाएँ होती हैं चित्र का प्रयोग किया जाता है । लाभ -
( 1 ) पाठन की प्रारम्भिक स्थिति को सरल बनाने के लिए शब्द के स्थान पर
( 2 ) इस पद्धति के अन्तर्गत प्रयुक्त किया जाता है , तथा
( 3 ) परम्परागत मुद्रित सामग्री का स्थानान्तरण किया जाता है ।
( ब ) अधिगम बाधित बालकों हेतु सुधारात्मक आयाम ( Remedial Approach for LD Children ) इन व्यवस्थाओं से युक्त नियमित कक्षाओं में सामान्य अथवा साधारण रूप से अधिगम बाधित बालक सन्तोषजनक कार्य कर सकते हैं सामान्य कक्षा पाठ्यक्रम में कुछ परिवर्तन किया जा सकता है । कुछ सामान्य सुधारात्मक प्रविधियाँ यह है , परन्तु इन प्रविधियों के साथ - साथ कुछ विशिष्ट सैद्धान्तिक प्रारूप का भी प्रयोग अधिगम बाधित बालक के लिए किया जाना आवश्यक है ।
1. ज्ञानात्मक प्रक्रिया आयाम ( Cognitive Processing Approach ) ज्ञानात्मक प्रक्रिया आयाम के अन्तर्गत यह पता चल जाता है कि बालक कैसे सीखता है तथा कैसे शिक्षण का प्रारूप प्रस्तुत करता है । विकासात्मक आयाम के लिए क्रमयुक्त आयाम पर जोर देता है । इन आयामों में किए जाने वाले परीक्षणों के माध्यम से अधिगम क्षति के अन्य क्षेत्रों का भी पता चलता है , जिनको पढ़ाया जा सकता है ।
2. विशिष्ट प्रविधियों से युक्त आयाम ( Specialized Techniques Approach ) - विशिष्ट प्रविधियाँ इस तथ्य को इंगित करती है कि अध्यापक विशेष समय अन्तराल में बताए गए अनुदेशन तथा उपयोग को प्रयोग करेंगे निपुणताओं में विकासात्मक आयामों में निपुणता में बुद्धि विकसित की जा सकती है । अधिगम बाधित बालकों की चिकित्सा के लिए मुद्रित सामग्री भी प्रयोग की जा सकती है ।
3. व्यवहार सम्बन्धी आयाम ( Behavioural Approach ) - व्यवहार सम्बन्धी पद्धति अधिगम सम्बन्धी वातावरणीय परिस्थितियों को संलग्न करने के लिए व्यवहार में आवश्यक परिवर्तन से सम्बन्धित है । पुनर्बलन को लागू करके तथा व्यवहार में परिवर्तन करके व मनो उपचार की पद्धति को प्रयोग करके अधिगम बाधित वालकों की समस्याओं के समाधान में सहायता मिल सकती है तथा अध्यापक तथा विद्यार्थियों के मध्य स्वस्थ शैक्षिक प्रणाली में कमियों से सम्बन्ध स्थापित हो सकता है । पाठन असफलता का मुख्य कारण शैक्षिक प्रणाली में दोषों अर्थात् अच्छे शिक्षण का अभाव है बालक के अध्यापक के शिक्षण तथा शैक्षिक वातावरण यह दोनों अधिगम बाधित बालक की चिकित्सा में सहयोग दे सकते हैं ।
