कोठारी कमीशन ने शिक्षा के पाठ्यक्रम

कोठारी कमीशन ने शिक्षा के पाठ्यक्रम की किन - किन सम्भावनाओं प अपने विचार रखे हैं ? 



 विद्यालय का पाठ्यक्रम ( School Curriculum ) शिक्षा का आधार पाठ्यक्रम रहा है । इसी पाठ्यक्रम के द्वारा हम अपेक्षित उद्देश्यों क पूर्ति करना चाहते हैं । शिक्षा शास्त्री इस बात पर जोर देते हैं कि शिक्षा का माध्यम जि पाठ्यक्रम को बनाया गया है , उसने निष्क्रियता उत्पन्न की है । कमीशन ने पाठ्यक्रम की स सम्भावनाओं पर गम्भीरतापूर्वक विचार किया है ।

 1. पाठ्यक्रम में सुधार की आवश्यकतायें भारतभूमि ही ऐसी भूमि है जहाँ पर राष्ट्र नियोजक , शिक्षा और उसके पाठ्यक्रमों में आयोजना से परे उस निमाण में लगे हैं जिससे जनता को विशेष लाभ होने वाला नहीं है • विदेशों में शिक्षा तथा पाठ्यक्रम पर पहले ध्यान दिया जाता है । देश की आवश्यकतानुसार् पाठ्यक्रम में अनुसंधान होता है और अपने यहां एक प्रकरण निकाल कर दूसरा प्रकरण जोड़ने का नाम ही पाठ्यक्रम सुधार कहलाता है । शिक्षा आयोग ने पाठ्यक्रम में सुधार हेतु इस प्रकार सुझाव दिये हैं ।

1. विश्वविद्यालयों में शिक्षा विभाग अनुसंधान के आधार पर पाठ्यक्रम का निर्माण करें ।

 2. समय - समय पर इन अनुसंधानों में आवर्तन ( Revision ) होते रहने चाहिये ।

 3. पाठ्य पुस्तकों तथा पाठ्य - सामग्री का निर्माण किया जाये । 4. सेवाकालीन पाठ्यक्रम के द्वारा अध्यापकों में उद्भावना उत्पन्न हो । 

5. स्कूलों में नये पाठ्यक्रम प्रयोग करने की स्वतन्त्रता होनी चाहिये । यह कार्य ट्रेनिंग कॉलेजों में सम्बद्ध स्कूलों में होना चाहिये । 

6. स्टेट बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन को सभी विषयों में पाठ्यक्रम , बनाकर सभी सुविधाओं वाले स्कूलों में उनका प्रयोग करना चाहिए । 

7. विभिन्न विषयों की अध्यापक परिषदें , नेशनल कौसिल तथा स्टेट इन्स्टीट्यूट्स आदि के सहयोग से पाठ्यक्रम बनाये जायें । 


2. पाठ्यक्रम का संगठन आयोग इस बात को अनुभव करता रहा है कि स्कूल शिक्षा के पहले सात वर्षों में सबके लिये सामान्य शिक्षा का एक अविभाजित पाठ्यक्रम निर्धारित होना चाहिए । पहली से दसवीं कक्षा तथा पाठ्यक्रम की एक अविछिन्न धारा चलेगी जिसकी समाप्ति पहली वाह्य या सार्वजनिक परीक्षा से होगी और इस सामान्य क्रम में किसी प्रकार धारांकन ( Streaming ) या विशेषीकरण नहीं होगा । अन्तःप्रमुख संस्तुतियाँ इस प्रकार हैं

 1. अव्यवसायिक स्कूलों में 10 वर्ष का सामान्य शिक्षा का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाय । 

2. उस अवस्था के अन्त में पाठ्यक्रम की उपलब्धि के स्तर का पता लगा लिया जाए । 

3. प्राइमरी स्तर पर विषयों का वोझ न लादा गया । केवल भाषा , गणित तथा वातावरण का ज्ञान करने वाले विषय पढ़ाये जायें । 

4. हायर प्राइमरी स्तर का पाठ्यक्रम विस्तृत और गहरा हो जाना चाहिए । शिक्षण पद्धतियाँ विधिवत् इस्तेमाल की जायें । 

5. लोअर सेकेण्डरी स्तर पर विस्तार तथा गहराई के साथ पढ़ाया जाय । 

6. हायर सेकेण्डरी स्तर पर विषयों में वैभिन्य ( Diversification ) हो जाये । 

7. हायर प्राइमरी में प्रतिभावान वालकों को अधिक सुविधा देनी चाहिए । उन्हें एक विषय और या उसी विषय को अधिक गहराई के साथ पढ़ाया जा सकता है । 

8. सेकेण्डरी स्तर पर दो प्रकार के कोर्स हों- ( i ) सामान्य ( Ordinary ) , ( ii ) उन्नत ( Advance ) । 



3. भाषा शिक्षण 

1. नई भाषा नीति शिक्षण के सम्बन्ध में होनी चाहिये । 

2. भाषा नीति इस प्रकार हो- . 

( 1 ) मातृभाषा के बाद हिन्दी को संघ की भाषा मान लिया जाये ।[ समावेशी विद्यालय का सूचन 

( 2 ) अंग्रेजी व्यावहारिक ज्ञान छात्रों के लिये उपयोगी है ।

 ( 3 ) भाषा का विकास अध्यापक और उसके गुणों पर आधारित है ।

 ( 4 ) कक्षा VII - X तक तीन भाषायें बालक को आ जानी चाहिए ।

 ( 5 ) दो अतिरिक्त भाषायें । 

( 6 ) हिन्दी तथा अंग्रेजी वहाँ लागू की जायें जहाँ उनकी आवश्यकता है या प्रेरणा है । 

( 7 ) किसी भी स्तर पर चार भाषायें अनिवार्य की जायें । 



3. त्रिभाषी सूत्र ( Formula ) इन सिद्धान्तों पर आधारित हो

 ( 1 ) मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा । 

( 2 ) केन्द्र सरकार की सरकारी तथा सह - सरकारी भाषा ( जब तक चले ) । 

( 3 ) एक आधुनिक भारतीय या योरोपीय भाषा जो 

( i ) तथा ( ii ) में न आई हो जो शिक्षा के माध्यम के रूप में प्रयोग की जाती हो । 



1. लोअर प्राइमरी स्तर पर सामान्य रूप से एक भाषा पढ़ाई जाये । वह मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा हो । 

2. हायर प्राइमरी स्तर पर दो भाषायें पढ़ाई जायें , मातृभाष या क्षेत्रीय भाषा एवं सरकारी भाषा ।

3. लोअर सेकेण्डरी स्तर पर तीन भाषायें पढ़ाई जायें- ( i ) मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा , ( ii ) सरकारी या सह - सहकारी भाषा ( iii ) आधुनिक भारतीय भाषा । 


5. आधुनिक साहित्यिक भाषाओं ( अंग्रेजी को छोड़कर ) का अध्ययन चुने हुए स्कूलों में कराया जाये । अहिन्दी भाषी क्षेत्रों में हिन्दी तथा अंग्रेजी शिक्षा की व्यवस्था की जाये ।


 6. हिन्दी या अंग्रेजी को सरकारी तथा सह - सरकारी भाषा के रूप में तीन और छः वर्ष तक पढ़ाया जाना चाहिए । 


7. उच्च शिक्षा में भाषा का अध्ययन अनिवार्य न हो । 


8. राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी के प्रसार तथा प्रचार के प्रयत्न किये जायें लेकिन अनिच्छुक व्यक्तियों पर इसका अध्ययन न थोपा जाये । 


9. देवनागरी तथा रोमन लिपि में अच्छा साहित्य प्रकाशित किया जाये । 

10. अंग्रेजी शिक्षा पाँचवीं कक्षा से पहले आरम्भ न की जाए । 

11. शास्त्रीय भाषा ( संस्कृत , अरबी , फारसी ) को आठवीं कक्षा में विकल्प भाषा के रूप में लागू किया जाये । 


4. विज्ञान तथा गणित की शिक्षा विज्ञान तथा गणित शिक्षण सामान्य शिक्षा के रूप में हर छात्र को पढ़ाये जायें । ( i ) विज्ञान शिक्षण ( Science Teaching ) 

1 लोअर प्राइमी स्तर पर विज्ञान की शिक्षा वातावरण की शिक्षा के रूप में दी जाये । कक्षा VI में रोमन अंक , चार्ट , नक्शों आदि का ज्ञान कराया जाये । की योग्यता उत्पन्न होनी आवश्यक है । •

 2. हायर प्राइमरी स्तर पर तर्क का विकास होना चाहिये । तर्क तथा निष्कर्ष निकालन 

3. लोअर प्राइमरी स्कूल में लाइन्स कॉर्नर ( विज्ञान कोना ) तथा अपर प्राइमरी में प्रयोगशाला एवं व्याख्यान कक्ष होना आवश्यक है । 

4.लोअर सेकेण्डरी स्तर पर विज्ञान को मस्तिष्क के अनुशासन के रूप में विकसित किया जाये । करनी चाहिये ।

 5. लोअर सेकेण्डरी स्तर पर प्रतिभावान बालकों के लिये एडवांस कोर्स की व्यवस्था

 6. विज्ञान की शिक्षा कृषि तथा टेकनॉलोजी को जोड़ने वाली होनी चाहिए । ( ii ) गणित शिक्षण ( Maths Teaching ) RE

( 1 ) मानसिक विकास के लिये गणित शिक्षण पर पूरा ध्यान देना आवश्यक है ।

 ( 2 ) शिक्षा के सभी स्तरों पर गणित के पाठ्यक्रम को आधुनिकतम रूप दिया जाये । 

( 3 ) गणित तथा विज्ञान शिक्षण की पद्धतियाँ नवीनतम हों । ( ii ) 


सामाजिक अध्ययन तथा समाज विज्ञान ( Social Studies & Social Sciences ) न 

( 1 ) सामाजिक अध्ययन अच्छी नागरिकता के लिये अनिवार्य है । इसका पाठ्यक्रम राष्ट्रीय एकता तथा मानव एकता ( Unity of Man ) पर बल दे । 

 ( 2 ) सभी स्तरों पर सामाजिक अध्ययन की पद्धति में वैज्ञानिक भावना होनी चाहिये । अनुभव ( Work Experience ) कार्य कार्य - अनुभव से तात्पर्य है पिछले अनुभवों से लाभ उठाना तथा शिक्षा को उत्पादन चे के साथ जोड़ना । कार्य - अनुभव के द्वारा देशों में खाद्यान्नों में आत्म - निर्भरता , आर्थिक विकास , रोजगार , सामाजिक राष्ट्रीयता एकता , राजनैतिक विकास , औद्योगिक प्रगति सम्भव है । इसीलिए कमीशन ने शिक्षा में उत्पादकता पर जोर देते हुए निम्नलिखित सिफारिशें की हैं 


1. प्राथमिक स्तर पर कार्य अनुभव कार्यक्रम लागू हो । सेकेण्डरी स्तर पर यह कार्यशाला के रूप में कार्य करे । यह कृषि , उद्योग आदि के कार्य की व्यवस्था करे । 


2. जहाँ पर कार्यशाला न हो , वहाँ यन्त्रों तथा औजारों के सैट दिये जायें । 

3. अध्यापकों का प्रशिक्षण , कार्यशालाओं का प्रवन्ध एवं साहित्य का निर्माण हो । कमीशन ने कार्य - अनुभव की परिभाषा इस प्रकार की है- स्कूल - घर , दुकान , खेत , कारखाने या किसी अन्य जगह उत्पादन में शामिल होना " हमारे देश में महात्मा गाँधी द्वारा बेसिक शिक्षा के रूप में एक क्रान्तिकारी प्रयोग शुरू किया गया था । कार्य अनुभव की परिकल्पना वास्तव में उसी तरह की है । इसका वर्णन इस तरह भी किया जा सकता है कि औद्योगीकरण के मार्ग पर खड़े समाज के लिये जिस शिक्षा की कल्पना उन्होंने की थी , उसी की यह पुनर्व्याख्या है । 


( v ) समाज सेवा ( Social Service ) 

( 1 ) सामुदायिक विकास के लिये समाज सेवा कार्यक्रम लागू किया जाये । यह शिक्षा के सभी स्तरों पर हो । 

( 2 ) श्रम तथा समाजसेवा कार्यों के शिविरों की व्यवस्था हो । ( vi ) शारीरिक शिक्षा ( Physical Education ) मानसिक चैतन्य , शारीरिक योग्यता , कुशलता को बनाये रखने के लिए तथा चरित्र के निर्माण के लिये शारीरिक शिक्षा दी जाय । बालक के विकास के सिद्धान्तों पर आधारित इस शिक्षा में परिवर्तन भी किये जा सकते हैं ।

 ( vii ) नैतिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों की शिक्षा ( Moral & Spiritual Education ) 

( 1 ) संगठित रूप में नैतिक शिक्षा देकर आध्यात्मिक मूल्यों का निर्माण होना चाहिये । इसमें प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष विधियों का प्रयोग किया जाना चाहिये । 

( 2 ) नैतिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों के विकास के लिये टाइम - टेबिल में एक यादें पीरियड अवश्य हों । विषय पाठ्यक्रम से सम्बन्धित हो । 

( viii ) रचनात्मक क्रियाएँ ( Creative Activities ) 

( 1 ) सरकार को कला शिक्षण की सम्भावनाओं का अध्ययन करने के लिए एक समिति का निर्माण करना चाहिये । 

( 2 ) स्थानीय समुदायों की सहायता से देश के हर भाग में बाल - भवनों ( Children's Home ) की स्थापना करनी चाहिए । 

( 3 ) चुने हुए विश्वविद्यालयों में कला विभाग खोले जायें । 

( 4 ) आत्माभिव्यक्ति ( Self - expression ) के लिए सहभागी ( Co - curricular ) क्रियाओं का संगठन करना चाहिये । 


( ix ) लड़के - लड़कियों के पाठ्यक्रम में अन्तर ( Difference between the curriculum of Boys & Girls ) हंसा मेहता समिति की रिपोर्ट के अनुसार लिंग ( Sex ) के आधार पर पाठ्यक्रम में भेद न हो । गृह विज्ञान लड़कियों के लिये हो , पर वह अनिवार्य न हो । संगीत तथा ललित कलाओं , विज्ञान तथा गणित की शिक्षा के लिये प्रोत्साहन दिया जाये ।


 ( x ) नये पाठ्यक्रम तथा बुनियादी शिक्षा ( New Curriculum and Basic Education ) बुनियादी शिक्षा का आधार उत्पादन है । उत्पादन क्रियाओं से पाठ्यक्रम आगे बढ़े । वालक समुदाय के सम्पर्क में आये । वह इस प्रकार का रूप ग्रहण कर ले कि शिक्षा के सभी स्तरों पर शिक्षा प्रणाली निश्चितें हो जाये । शिक्षा की सभी अवस्थाएँ बुनियादी हों । बुनियादी शिक्षा के नाम से शिक्षा की अलग श्रेणी या वर्ग न बने ।