अधिगम बाधित बालकों का वर्गीकरण कीजिए । अधिगम बाधित बालक का वर्गीकरण
( Classification of Learning Disabled Children ) विश्लेषण तथा लक्षणों के आधार पर ज्ञानात्मक तथा बोधात्मक क्षेत्रों को विभाजित कर सकते हैं तथापि उनकी समस्याओं को स्पष्ट करने वाली दो विस्तृत वर्ग नहीं समझाना चाहिए ,
निम्नांकित में इस दस चुने गए क्षेत्रों का वर्णन किया गया है ।
1. नेत्र व हाथ की क्रियाओं में सामंजस्य का अभाव ( Eye - Hand Co ordination ) - इस क्षेत्र के अन्तर्गत दृश्य के साथ हाथों के प्रभाव पूर्ण प्रयोग की गति की संचालन करने की योग्यता को सम्मिलित किया जाता है । नेत्र व हाथ की क्रियाशीलता की समस्या से ग्रस्त बालक को धारा प्रवाह लेखन के लिए आवश्यक गति नियन्त्रण में कठिनाई उत्पन्न हो सकती है । ऐसा बालक अच्छी तरह पढ़ सकता है , उच्चारण कर सकता है , समझ सकता है तथा अन्य मौखिक कार्यों में भी अच्छा होता है फिर भी नेत्र व हाथ की कार्यक्षमता की समस्या के कारण वालक को दृश्य प्रत्यक्षीकरण कम हो जाता है , जिससे उसका विद्यालयी क्रियाएँ बाधित होती है , कभी - कभी इसके बहुत परिणाम होते हैं ।
2. आकृति पृष्ठभूमि सम्बन्धी प्रत्यक्षीकरण ( Figure Ground Perception ( FG } ) - इसको चयनात्मक ध्यान भी कहा जा सकता है । इसके अन्तर्गत एक समय में उसी एक उद्दीपन पर ध्यान दिया जाता है जिस पर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है तथा अर्थपूर्ण अनुभव ज्ञान प्राप्त करने के लिए वहाँ उपस्थित अन्य उद्दीपन को नकार दिया जाता है । आकृति सम्बन्धी बोध कमजोर बालक को अपने ज्ञान का क्षेत्र संकीर्ण लग सकता है क्योंकि वह उन प्रासंगिक से उद्दीपन प्रासंगिक उद्दीपन को नहीं अलग कर पाता है । कभी कभी वालक को क्रमानुसार उद्दीपन का सामना करना पड़ता है और इसका कोई अर्थ नहीं होता , उसकी बोधात्मक अवस्था भी भ्रमित हो जाती है । ऐसा बालक परिश्रम नहीं कर पाता इसका परिणाम तो अव्यवस्थित क्रियाएँ होती हैं या फिर उसकी शैक्षिक असफलता होती है ।
3. आकृति स्थिरता ( Figure constancy ( FC ) ) - इसके अन्तर्गत बालक की प्रतीक आकृति तथा आकार को इसकी निर्देशन दिशा तथा स्थिति में बदलाव के आधार पहचानने की योग्यता को सम्मिलित किया जाता है । चित्रों , आकार , रेखाचित्र , शब्द प्रतीक तथा आकृतियों को समझने की योग्यता को भी इस क्षेत्र में सम्मिलित किया जाता है । आकृति की स्थिरता बालक के बोध का स्तर ठोस होता है वह सूचना को एक परिस्थिति से दूसरी परिस्थिति में स्थानान्तरित नहीं कर पाता , उसका ध्यान तथ्यों पर आधारित है वह तथ्यों को उसके वास्तविक रूप में ही पहचानता है । यदि किसी वस्तु या चित्र को बदल दिया जाए तो वह उसे नहीं पहचान पाता है ।
4. आकृति की दूरी ( Position in Space ( SP ) ) - यह निरीक्षण तथा वस्तु के स्थान के बीच सम्बन्ध को जानने की योग्यता से सम्बन्धित है । जैसे यह देखने वाले व्यक्ति के आगे , पीछे , सामने तथा अगला हो सकती है । अन्तर सम्बन्धी स्थिति से प्रभावित वालक को किसी भी तथ्य का सही क्रम जानने में कठिनाई हो सकती है । उसे सही आकृतियाँ बनाने में कठिनाई हो सकती है । उसकी ' म ' और ' य ' एवं ' प ' और ' फ ' तथा ' 14 ' तथा ' 41 ' के बीच अन्तर नहीं मालूम होता । यह नकारात्मकता उसकी पाठन योग्यता को प्रभावित करती है , जिसके परिणामस्वरूप उसकी समझने तथा विषय को प्रकट करने की योग्यता अवरुद्ध हो जाती है ।
5. स्थान सम्बन्धित ( Spatial Relation ( SR ) ) - यह दो या दो से अधिक वस्तु के अपने तथा एक - दूसरे के बीच सम्बन्धों को समझने की योग्यता पर आधारित है जिस बालक को स्थान सम्बन्धित कठिनाई होती है , उसे कार्य करने में शिक्षा के सन्दर्भ में पढ़ने , लिखने , उच्चारण करने तथा निर्देशन न समझ आने सम्बन्धी समस्याएँ हो सकती हैं ।
6. श्रव्य प्रत्यक्षीकरण ( Auditory Perception ( AP ) ) - इसके अन्तर्गत बालक की श्रव्य उद्दीपन को पहचानने तथा सूचना को ग्रहण करने एवं क्रमागत योग्यता को सम्मिलित किया जाता है । श्रव्यात्मक बोध में श्रव्यात्मक अन्तर तथा वालक के स्तरों का व्यवस्था तथा उसकी मौखिक भाषा प्रवाह तथा शब्दों का आकार एवं स्वरूप का संगठन करने की योग्यता भी श्रव्य बोध के अन्तर्गत सम्मिलित की जाती है ।
7. ज्ञानात्मक योग्यता ( Cognitive Abilities ( CA ) ) इस क्षेत्र का सम्बन्ध बालक के उद्दीपन को विपरीत क्रम में मिलाने की योग्यता से है और यह ज्ञानात्मक क्रियात्मक तथा भावात्मक पक्ष के लिए भी है । बालकों की स्वयं की समझने की प्रक्रिया के स्तर को विभिन्न समूहों में विभाजित करने की योग्यता के लिए आवश्यक है । ज्ञानात्मक योग्यता के क्षेत्र के अन्तर्गत बालक की समझने की प्रक्रिया में अनुभव के आधार पर स्मृति तथा जोड़ने को भी सम्मिलित किया जाता है । वालक की उच्च स्तर की प्रक्रियाओं की योग्यताओं तथा उपयुक्त कार्य करने के लिए यह आवश्यक है कि वालक सामान्य वर्ग में सूक्ष्म अन्तर को समझ सकें ।
8. स्मृति ( Memory { M } ) - यह समस्त अधिगम का आवश्यक घटक है यह जो अधिगम किया गया है । उसे याद करने की योग्यता से सम्बन्धित होता है ।
9. भाषा बोधगम्यता ( Receptive Language ( EL ) ) - भाषा बोधगम्यता के अन्तर्गत दृश्य उद्दीपन की प्रक्रिया के प्रयोग को सम्मिलित किया जाता है ।
10. भाषा की अभिव्यक्ति ( Expressive Language ) - इसके अन्तर्गत बालक की भाषा को सही संकेतों को प्रयोग करने व उसकी भाषा कौशलों के स्वरूप की जानकारी को सम्मिलित किया जाता है । बालक के ग्राह्य बोध को भी भावपूर्ण भाषा क्षेत्र के अन्तर्गत सम्मिलित करते हैं ।
