अधिगम असमर्थी बालक किसे कहते हैं ? इनकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए । उत्तर अधिगम असमर्थी बालक का अर्थ ( Meaning of Learning Disabled Children )

 . अधिगम असमर्थी बालक किसे कहते हैं ? इनकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए । उत्तर अधिगम असमर्थी बालक का अर्थ ( Meaning of Learning Disabled Children ) 



बालकों की शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार की कठिनाई एक रहस्य है अर्थात् एक गूढ़ रहस्य है । यह समस्या शिक्षा विडों के लिए नई नहीं है , परन्तु अधिगम असमर्थिता के प्रत्यय का अधूरा इतिहास है । कुछ बालक सामान्य प्रतीत होते हैं , परन्तु लगभग प्रत्येक अवधि में वह अधिगम सम्बन्धी समस्याएँ बतलाते हैं । वह अक्षरों के क्रम को भली प्रकार से नहीं लिख पाते , परन्तु उसे उलट पलट कर लिख देते हैं । जैसे खाना को नाखा , राम को मरा आदि लिखते हैं । ऐसे बालक शब्दों पर अपना ध्यान एकाग्र नहीं कर पाते । यदि बालकों के आसपास शोर अथवा कोलाहल हो तो बालक पूर्ण रूप से एकाग्रचित्त न होने के कारण त्रुटियों की सम्भावना अधिक हो जाती है । अमेरिका में बाधित बालकों से सम्बन्धित राष्ट्रीय सलाहकार समिति ने गम्भीर असमर्थिता को निम्न प्रकार से परिभाषित किया है अधिगम असमर्थी बालक एक अथवा एक से अधिक मनोवैज्ञानिक क्रियाओं में दोष दर्शाते हैं । यह दोष भाषा के लिखने , बोलने अथवा समझने से सम्बन्धित होते हैं । दोषों का आधार सुनना , सोचना , सम्प्रेषण , पढ़ना , लिखना , वर्तनी करना , भाव व्यक्त करना तथा गणित सम्बन्धी अंकों आदि का होता है । इसमें बालक की ऐसी अवस्थाएँ भी सम्मिलित होती हैं जो मस्तिष्क में चोट , मस्तिष्क का सुचारू रूप से कार्य न करना , डिस्लैक्सिया ( dyslexia ) अथवा अफैसिया ( aphasia ) का बढ़ना आदि समस्याओं से सम्बन्धित होते हैं । इसमें अधिगम समस्याएँ सम्मिलित नहीं होती हैं , जो बालक की शारीरिक , श्रवण दृष्टि , मानसिक मन्दिता , हाथ पैरों का सुचारू रूप से कार्य न करना , भावनात्मक विक्षोभ अथवा वातावरण में किसी प्रकार की कमी अथवा अनुपयुक्त आदि समस्याएँ किसी भी प्रकार से प्रभावशाली नहीं होती है । अर्थात् ऐसे बालकों में उपरोक्त समस्याएँ नहीं पाई जाती हैं ।


 अधिगम असमर्थिता की परिभाषा ( Definition of Learning Disability ) अमेरिका ( 1968 ) की अपंगों की राष्ट्रीय सलाहकार समिति के असमर्थिता ” की परिभाषा इस प्रकार दी हैं अनुसार " अधिगम " बालकों की विशिष्ट अधिगम असमर्थिता बालक के द्वारा भाषा को लिखने या बोलने में , मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं में एक अथवा एक से अधिक सुचारू रूप से प्रणाली का कार्य न कर पाना होता है । इस प्रकार की कमियों का मुख्य आधार सुनने , बोलने , समझने , विचार करने , पढ़ने , लिखने , गणना करने तथा शब्दों के विभिन्न वर्तनी दोष करने में कमजोरी का पाया जाना होता है । इस प्रकार की असमर्थता में शारीरिक बाधिता जैसे डिस्लैक्सिया ( dyselxia ) अथवा अफैसिया ( ashasin ) का विकसित होने की दशा से भी तात्पर्य है जिसे इसमें सम्मिलित किया गया है । इसमें अधिगम सम्बन्धी समस्याएँ सम्मिलित नहीं है. वातावरण का समुचित न होने के कारण होती है । " जो मुख्यतया दृष्टि , अधिगम , हाथ पैर , मानसिक मन्दिता , भावनात्मक विक्षोभ अथवा • 

अधिगम असमर्थी बालकों की विशेषताएँ ( Charasteristics of LD Children )

अधिगम असमर्थी बालकों के मुख्य गुणों के वर्गीकरण करने हेतु अनेक प्रयास किए गए हैं । कलेमेन्ट्स ने ( 1966 ) में अधिगम असमर्थी बालकों का अध्ययन विस्तृत रूप में किया । उन्होंने यह अनुमान लगाया कि अधिगम असमर्थता मानसिक तथा नाडियों के दोषों अथवा नाड़ी संस्थान में किसी प्रकार की क्षति के कारण होता है ।

 ऐसे बालकों में अधिकांश रूप से निम्न विशेषताएँ पाई गई , जो निम्नलिखित हैं 

( 1 ) अधिगम असमर्थी बालकों की वाणी तथा भाषा ( Language and Speech of LD Children ) अधिगम असमर्थी वालकों को भाषा को समझने तथा भाव व्यक्त करने में कठिनाई आती हैं । भाषा के भाव व्यक्त करने में भाषा सीखने की अपेक्षा अधिक कठिनाई होती है । अधिगम असमर्थी बालकों को सुनने तथा स्पष्ट रूप से शब्दों को बोलने में कठिनाई नहीं होती है , परन्तु ऐसे बालकों को वाक्यों को बनाने अथवा वाक्यों को संयुक्त करने में कठिनाई होती है । ऐसे बालक विस्तृत वाक्यों के अर्थ अथवा भाव को समझने अथवा सर्वनाम का प्रयोग करने में कठिनाई नहीं होती । उन्हें कर्म वाक्य ( Passive ) वाक्यों को समझने तथा प्रयोग करने , नकारात्मक तथा भूतकाल वाक्यों में कठिनाई होती है । इसके अतिरिक्त विशेषण तथा क्रिया विशेषण में भी कठिनाई होती है । वह बातचीत करने में असफल रहते हैं तथा तर्क करना या प्रश्न पूछना आदि में भी संकोच करते हैं । जहाँ तक लिखित भाषा का सम्बन्ध है , उन्हें हस्तलिखित कार्य करने में कठिनाई होती है । उन्हें शब्दों के वर्तनी तथा व्याकरण सम्बन्धी कार्य में भी अधिगम असमर्थी बालकों को सामान्य बालकों की अपेक्षा अधिक कठिनाई होती है , जबकि उनका बुद्धि स्तर पर नियन्त्रण रहता है । 

( 1 ) अधिगम असमर्थी बालकों की श्रवण तथा शब्दों को ग्रहण करना , भावों को समझना , यदि कोई विचार या शब्द समझ न आए तो उसके दोहराने के लिए शिक्षक से कहने आदि का साहस नहीं होता है ।

 ( 2 ) वह शब्द ग्रहण तथा देखने में भी कठिनाई होती है अर्थात् वह बोलकर पढ़ना तथा बिना भावों को समझकर पढ़ने में भी कठिनाई होती है ।

 ( 3 ) उनमें भावों को बोलकर समझाने की योग्यता नहीं होती अर्थात् वाक्यों या शब्दों को संयुक्त करना तथा अपने विचारों को व्यक्त करने में भी ऐसे बालक सक्षम नहीं होते हैं । 

( 4 ) उनमें शारीरिक अंगों ( हाथ / पैर ) की समस्या स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है । शब्द की वर्तनी कला , शब्दों को पूर्ण रूप से भूल जाना , अक्षरों का क्रम आदि समझने की योग्यता इस प्रकार के बालकों में नहीं होती है । भाषा कौशलों का अभाव रहता है । 

2. अधिगम असमर्थी बालकों में प्रत्यक्षीकरण तथा कार्य क्षमता ( Perceptual and Motor Ability ) लर्नर ( 1985 ) ने यह स्पष्ट रूप से कहा कि अधिगम असमर्थी बालकों में स्थान सम्बन्धी तथा विभिन्न स्थानों में सम्बन्ध , चित्रों तथा गणित की संख्याओं के देखने में भेद करना , शब्दों या वाक्यों को सुनकर उन्हें क्रमबद्ध करना तथा सुनी हुई बातों को याद करना आदि । कार्यों में भी उन्हें समस्या होती है । इसके अतिरिक्त लर्नर ने अधिगम असमर्थी बालको के बारे में यह भी तथ्य दिया है कि ऐसे बालक सामाजिक ज्ञान तथा इससे सम्बन्धित बोध का न होना भी है । ऐसे बालक शारीरिक कौशल , कलात्मक , शरीरिय तथा शारीरिक प्रतिबिम्ब में समस्या होती हैं तथा ज्यामितिय रचनाओं का अनुकरण नहीं कर सकते । 

( 1 ) ऐसे बालक इन्द्रियों द्वारा किसी वस्तु को पहचानने , भिन्नता तथा अर्थ समझने के अयोग्य होते हैं । 

( 2 ) ज्यामितीय आकृति को बनाने में असमर्थ होते हैं अर्थापन में कठिनाई होती है 

( 3 ) ध्वनि की पहचान नहीं कर पाते आवाज सुनकर समझने में कठिनाई होते हैं , किसी वस्तु को छूकर पहचान करने में भी असमर्थ होते हैं ।

 ( 4 ) इन्द्रियों द्वारा बोध करने के अयोग्य होते हैं । जगह का अभिविन्यास , दिशाएँ , वस्तुओं के सामंजस्य ( co - ordination ) एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाना , किसी वस्तु के बारे में विचार करने , भाषा ग्रहण करने की योग्यता आदि के क्षेत्र में ऐसे बालक असमर्थ होते हैं ।

 ( अ ) शारीरिक क्रिया ( Motor Activity ) - इन क्रियाओं में शारीरिक क्रिया के अनुसार परिवर्तन होता है । इनका वर्णन निम्नलिखित हैं।

 ( ब ) संवेगात्मक क्रिया ( Hyper Activity ) - भावात्मक रूप से स्थिर नहीं रहते हैं । एक ही दशा में शान्त रहने के अयोग्य , कक्षा में बहुत अधिक बातें करना अथवा बोलना काम के प्रति लापरवाही भावात्मक क्रिया के विपरीत शब्द - आलसी , शान्त , उदासीन।

 ( स ) शारीरिक अंगों में असामंजस्य ( Incordination ) - शारीरिक रूप से विकृत , हाथ / पैर अथवा शारीरिक अंगों की समन्विता में कमी , दौड़ने , चलने के कार्यों में कमी किसी वस्तु को पकड़ने , कूदने , लिखने , आकृति बनाने , कला आदि में कमी चलने में फिसलना अथवा गिर जाना तथा दूसरे से अनुचित व्यवहार करना । 

( द ) संचयीकरण ( Preservation ) -अस्वेच्छा व्यवहार का जारी रहना , इस प्रकार का व्यवहार बोलने , लिखने , कला , मौखिक पढ़ना , शब्दों की वर्तनी में दोष तथा त्रुटियों को बार - बार दोहराना देखा जा सकता है । 

( 3 ) अधिगम असमर्थी बालकों की सामाजिक तथा संवेगात्मक विशेषताएँ ( Social and Emotional Characdteristis of Lis Children ) ऐसे बालक अन्य व्यक्तियों कीतरफ आकर्षित भी आसानी से नहीं होते हैं तथा यह अपने आपको पीछे भी हटा लेते हैं । ऐसे बालकों को सामाजिक व्यक्ति के साथ - साथ अपने माता - पिता तथा अध्यापकों के साथ विचार - विमर्श करने में समस्या होती है । ऐसे बालकों में सामाजिक निपुणता तथा उनके व्यवहार में भी समस्या होती है अधिकांश अधिगम असमय बालक अपनी निजी समस्याओं के प्रति आन्तरिक चेतना बहुत कम होती है तथा उन्हें भाग्य के ऊपर छोड़ दिया जाता है । ऐसे बालकों में अपने सोचने समझने का स्तर कम होता है । आगे बढ़ने अथवा जीवन में प्रगति करने के विचारों का स्तर निम्न कोटि का होता है तथा बाहरी व्यक्तियों तथा वस्तुओं की सहायता लेकर जीवन पथ पर चलते हैं । 

( 1 ) ऐसे वालक शान्त तथा आज्ञाकारी होते हैं यह पढ़ नहीं सकते हैं तथा दिन में स्वप्न भी देखते हैं । (

 2 ) किसी स्पष्ट कारण के न होते हुए भी ऐसे बालकों को क्रोध अधिक आता है , जो विस्फोट का रूप धारण कर सकता है । 

( 3 ) ऐसे बालक शारीरिक रूप से शिथिल होते हैं तथा उन्हें किसी विशेष विन्दु पर ध्यान स्थिर करने में कठिनाई होती है । 

( 4 ) ऐसे बालक एक वस्तु से दूसरी वस्तु पर शीघ्र बदलते हैं तथा दूसरों के द्वारा किए जा रहे कार्यों पर अपना ध्यान रखते हैं , लेकिन अपने पर ध्यान नहीं । 

( 5 ) वह स्वयं नियन्त्रण के बारे में बाते करते हैं , परन्तु अन्य बालकों के साथ कार्य नहीं कर सकते हैं । 

( 6 ) वह भावनात्मक रूप से अस्थिर स्वभाव के होते हैं । ऐसे बालकों में भावुकता होने का प्रमुख कारण माता पिता पर निर्भर होना तथा बाह्य संसार से सम्बन्धों में कमी होना पाया जाता है । इसके कारण बालकों में घुटन का भाव रहता है । अधिगम असमर्थी बालक विषमांगी समूह बनाते हैं । कुछ बालकों को पढ़ने में समस्या होती है और कुछ को लिखने में कठिनाई होती है । जहाँ कुछ बालक समझने तथा विस्तृत बातों में समस्या का सामना करते हैं तो कुछ वालकों को समय व्यतीत करने में तथा मानचित्र में किसी स्थान को खोजने में समस्या होती है । इस प्रकार इस निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है कि अधिगम असमर्थी बालकों की समस्याओं की विशेषताएँ सरलता से नहीं बताई जा सकती हैं । सामान्य रूप से ऐसे बालकों की समस्याएँ भी निम्नलिखित होती हैं

 1. योग्यता स्तर ( Ability Level ) - ऐसे बालकों का योग्यता स्तर औसत के लगभग होता है । यह बालक सामान्य योग्यता स्तर के नीचे तथा ऊपर भी हो सकता है । 

2. क्रियात्मक स्तर ( Activity Level ) - अधिगम असमर्थी बालकों में क्रियात्मक स्तर या तो बहुत अधिक होता है अथवा बहुत कम । यदि कोई वालक का क्रियात्मक स्तर बहुत अधिक है तो उसके व्यवहार की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं । बिना रूके हाथ / पैर अथवा शरीर का कोई अन्य अंग गतिशील रहता है । ऐसे बालक शान्त नहीं बैठ सकते , कक्षा में एक सीट से दूसरी सीट पर बैठते हैं , हाथ या पैर ऊंगलियों को थपथपाते रहते हैं , एक कार्य को छोड़कर दूसरा कार्य करना प्रारम्भ कर देते हैं और यदि किसी बालक का क्रियात्मक स्तर इसके विपरीत है अर्थात् बालक निम्न कोटि के क्रियात्मक स्तर का है तो वह बालक पूर्णतया शान्त रहता है , किसी कार्य के प्रति अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करता , तथा प्रत्येक कार्य बहुत धीमी गति से करता है । 

3. अवधान सम्बन्धी समस्या ( Attention Problems ) -अधिगम असमर्थी बालक का ध्यान किसी कार्य क्षेत्र पर केन्द्रित बहुत कम समय के लिए होता है । अधिक अवधि के लिए किसी भी कार्य पर उनका मस्तिष्क केन्द्रित नहीं रह सकता है । उनका ध्यान समय समय पर भटकता है । उनक ध्यान किसी ऐसे कार्य पर केन्द्रित हो जाता है , जिसे बार - बार किया जाए । यह कार्य मौखिक अथवा शारीरिक अंग से सम्बन्धित हो सकता है । 

4. हाथ पैर अथवा शारीरिक अंग की क्रियात्मक समस्या - अधिगम असमर्थी बालक कुरूप तथा विकृत होते हैं । उनके हाथ , पैर , शरीर के अंगों का सामंजस्य भली प्रकार से कार्य नहीं कर पाता । ऐसे बालकों की कला तथा हस्तलेखन बहत अस्पष्ट होता है । वह व्यवहार तथा नीति में कुशल नहीं होते तथा उन्हें स्पर्श करने की अधिक आवश्यकता होती

 5. दृष्टि प्रत्यक्षीकरण समस्या ( Visual Perceptual Problems ) - अधिगम असमर्थी बालक विभिन्न वस्तुओं में अन्तर नहीं देख पाते । यदि दो वस्तुएँ उन्हें दिखाई जाएँ जो एक समान न हों तो वे दोनों वस्तुओं में भेद समझ पाने में असमर्थ होते हैं । उन्हें आकृति का भी बोध ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है । आकृति एवं पृष्ठभूमि ऐसे बालकों को किसी शब्द अथवा किसी वस्तु का कोई भाग यदि हटाकर दिखाया जाए अर्थात् आधी वस्तु या शब्द दिखाया जाए तो वे उसे पूरा करने में असमर्थ होते हैं । दृश्य समीपता वह वस्तुओं को याद रखने तथा यदि उन्हें विभिन्न वस्तुएँ किसी क्रम में दिखाई जाएं तो उन्हें वस्तुओं का क्रम भी याद नहीं रहता तथा दृश्य स्मृति भी कम होती है । 

6. श्रवण प्रत्यक्षीकरण समस्या ( Auditory Perceptual Problem ) - अधिगम असमर्थी बालक विभिन्न ध्वनियों में भेद स्पष्ट नहीं कर पाते । वह बोले गए शब्दों का अर्थ निकालने में भी असमर्थ होते हैं । वातावरण में विभिन्न प्रकार की आवाजों को पहचानने के अयोग्य होते हैं । यदि विभिन्न वस्तुएँ जो ध्वनि उत्पादक हो , उनमें से कोई एक उनके समक्ष रखी जाए तथा शेष सभी वस्तुएँ छुपाकर रखी जाएँ तब भी वह ध्वनि में भेद नहीं पहचान पाते । यदि किसी शब्द का कुछ भाग वोला जाए तो ऐसे बालक उस शब्द को पूरा नहीं पढ़ सकते हैं । वह किसी सुने गए शब्द अथवा वस्तु की ध्वनि को स्मरण करने में असमर्थ होते हैं तथा विभिन्न ध्वनियों के स्तर याद नहीं कर पाते हैं । 

7. भाषा सम्बन्धी समस्याएँ ( Language Problems ) -अधिगम असमय बालकों के द्वारा शब्दों को बोलने का विकास बहुत मन्द होता है अथवा अधिक समय के पश्चात् होता है । वह शब्दों को स्पष्ट बोलने में असमर्थ होते हैं तथा शब्दों को लययुक्त करके वाक्य बनाने के योग्य नहीं होते हैं । वह दो अथवा दो से अधिक वाक्यों को लययुक्त करने में असमर्थ होते हैं ।

 8. सामाजिक संवेगात्मक व्यवहार सम्बन्धी समस्याएँ ( Social Emotional Behaviour Problems ) -अधिगम असमर्थी बालक प्रकृति से संवेगात्मक होते हैं । वे अपने व्यवहार के परिणाम के बारे में सोचने तथा समझने में असफल होते हैं । कभी - कभी ऐसे बालकों का व्यवहार संवेगात्मक होता है अर्थात् वे वस्तुओं को उठाकर फेंक सकते हैं . अथवा तोड़ - फोड़ कर सकते हैं । उनमें सामाजिक समायोजन की भावना कम होती है । ऐसे बालकों की आयु तथा योग्यता को ध्यान में रखते हुए , उनमें समाज के साथ व्यावहारिकता बहुत निम्नकोटि की होती है । वे परिस्थितियों के परिवर्तन होने पर अपने आपको परिस्थितियो के अनुकूल नहीं बदल सकते हैं । ऐसे बालकों का व्यवहार , सोच आदि समय - समय पर जल्दी - जल्दी बदलते रहते हैं । 

9. अभिविन्यास सम्बन्धी समस्याएँ ( Orientation Problems ) -अधिगम असमर्थी बालकों में स्थान प्रत्यय के विकास की गति बहुत मन्द होती है । उन्हें वस्तुओं के आकार , आकृति में भेद करना , दो वस्तुओं के बीच की दूरी का अनुमान लगाना , किसी वस्तु के दायें तथा वायें भाग के बारे में समझने में कठिनाई होती है । उन्हें समय सम्बन्धी शब्दो का ( जैसे पहले , बाद में और अब , तब अथवा आज और कल ) पूर्ण रूप से ज्ञान नहीं होता तथा इसमें कठिनाई अनुभव करते हैं । 

10. कार्य सम्बन्धी आदतें ( Work Habits ) - अधिगम असमर्थी बालकों को कार्य संयोजन अथवा कार्य व्यवस्था में समस्या होती है तथा कार्य व्यवस्था में यह बालक कमजोर होते हैं । वह मन्द गति से कार्य करते हैं । कार्य करते - करते उस कार्य करने की दिशा से भटक जाते हैं तथा कार्य को लापरवाही से करते हैं ।

11. शैक्षिक असमर्थता ( Academic Disability ) - अधिगम असमर्थी बालकों को पढ़ने लिखने , गणित की संख्याओं , शब्दों की वर्तनी व समय बताने तथा मानचित्र में कोई स्थान ढूँढने आदि कार्य में समस्या आती है । सामान्य रूप से ऐसा कहा जा सकता है कि अधिगम असमर्थी बालकों को अधोलिखित विशेषताएँ होती हैं , परन्तु सभी अधिगम असमर्थी वालक उपरोक्त विशेषताएँ नहीं होती हैं । कुछ बालकों में एक अथवा एक से अधिक ऐसी विशेषताएँ हो सकती हैं ।