शिक्षक की भूमिका ( Role of Teacher )

शिक्षक की भूमिका ( Role of Teacher ) 


सफल शिक्षक के विभिन्न गुणों का वर्णन कीजिये । शिक्षक के व्यावसायिक गुणों का उल्लेख कीजिये । एक आदर्श शिक्षक की प्रमुख विशेषताओं का संक्षेप में वर्णन कीजिये । अथवा अथवा सफल शिक्षक के किन्हीं चार प्रमुख गुणों का उल्लेख कीजिये । अथवा सफल शिक्षक के सामाजिक गुण पर प्रकाश डालिये । शिक्षक के गुण उत्तर अब हम शिक्षक के मानवीय ( वैयक्तिक ) , व्यावसायिक और नैतिक गुणों पर प्रकाश डालेंगे
1. शिक्षक के वैयक्तिक गुण ( Individualistic Qualities of Teacher )
1. सामाजिकता - शिक्षक में सामाजिकता का गुण अवश्य होना चाहिए । समाज से अलग रहकर वह न तो अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है और न छात्रों को नागरिकता की शिक्षा प्रदान कर सकता है । अतः प्रत्येक शिक्षक अपने को समाज के निकट रखे ।
2. उत्तम स्वास्थ्य - आदर्श शिक्षक शारीरिक रूप से पूर्णतया स्वस्थ होता है । बिन अच्छे स्वास्थ्य के कोई भी शिक्षक न तो अपने कर्त्तव्यों का उचित प्रकार से पालन कर सकेगा । और न ही अपने उत्तरदायित्वों को निभा पायेगा । इस प्रकार एक अस्वस्थ शिक्षक शिक्षा विभाग और विद्यालय के लिए बोझ होता है । प्रभावशाली शिक्षण एक स्वस्थ शिक्षक ही कर सकता है ।
3. बुद्धिमान और अध्ययन प्रेमी - शिक्षक को बुद्धिमान तथा अध्ययन प्रेमी होना चाहिए । बुद्धि एक जन्मजात गुण है , जिसका आदर्श शिक्षक में निहित होना आवश्यक है ।
4. संवेगात्मक स्थिरता - छात्रों का भावात्मक विकास करने के लिए शिक्षक में संवेगात्मक स्थिरता का होना परमावश्यक है । प्राय : आर्थिक अभाव , व्यावसायिक कार्याधिकता तथा परिवार का व्यापक उत्तरदायित्व शिक्षक के लिए मानसिक अशान्ति का कारण होता है । चिन्ताएँ शिक्षक में संवेगात्मक अस्थिरता उत्पन्न करती हैं । परिणामस्वरूप वह कक्षा में शिक्षण प्रभावशाली ढंग से नहीं कर पाता तथा विद्यालय में अनेक समस्याएँ खड़ी कर देता है । मानसिक दृष्टि से स्वस्थ तथा संवेगात्मक स्थिरता वाला शिक्षक किसी भी समस्या का ह से समाधान करने , कठिनाई में उत्साह दिखाने , क्रोध और व्याकुलता में शान्ति दिखाने के गुण अपने अन्दर निहित रखता है ।
5. विनोदप्रियता - शिक्षक को हँसमुख तथा विनोदप्रिय होना चाहिए । कक्षा में आवश्यकता से अधिक गम्भीरता वातावरण में नीरसता उत्पन्न कर देती है । एक तानाशाह और कठोरता की मूर्ति बनकर कक्षा में पढ़ाना अनुचित है । भयभीत छात्र अपनी शंकाओं का समाधान करने में भी हिचकते हैं । अतः शिक्षक को पर्याप्त विनोदप्रिय होना चाहिये । उसका विनोदी स्वभाव कक्षा के वातावरण के तनाव को समाप्त कर देता है ।
6. नेतृत्व की योग्यता- शिक्षक में नेतृत्व की योग्यता भी होनी चाहिए , परन्तु उसका नेतृत्व राजनीतिक नेतृत्व न हो , वरन् उसका नेतृत्व उसके चरित्र , प्रभावपूर्ण वाणी , अनुशासनप्रियता , सामाजिकता तथा दूसरों से प्राप्त श्रद्धा और आदर पर निर्भर हो उसे सच्चे रूप में छात्रों का मार्गदर्शक होना चाहिए तथा उनकी विभिन्न कठिनाइयों को हल करने में यथासम्भव सहायता पहुँचानी चाहिए ।

2. शिक्षक के व्यावसायिक गुण ( Vocational Qualities of Teacher ) व्यावसायिक दृष्टि से आदर्श शिक्षक में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है
1. शिक्षा के उद्देश्यों के प्रति जागरूक - आदर्श शिक्षक शिक्षा के यथार्थ उद्देश्यों के प्रति पूर्णतया जागरूक रहता है और उन्हें एक पल के लिए भी अपनी दृष्टि से ओझल नहीं होने देता । उसका उद्देश्य छात्रों को केवल पुस्तकीय ज्ञान प्रदान करना मात्र नहीं होता , वरन बालकों की शिक्षा के महानतम् लक्ष्यों की प्राप्ति में अधिक से अधिक सहयोग देना होता है ।
2. विषय का पूर्ण ज्ञाता- शिक्षक को उस विषय का पूर्ण ज्ञाता होना चाहिए , जिसका कि वह शिक्षण करता है । यदि वह अपने विषय का पूर्ण ज्ञात न हो , तो वह अपने छात्रों का न तो ठीक प्रकार से ज्ञानात्मक विकास कर सकता है , वरन् कभी - कभी तो उसे उनके सम्मुख लज्जित भी होना पड़ सकता है ।
3. प्रयोगात्मक दृष्टिकोण - आदर्श शिक्षक का प्रयोगात्मक दृष्टिकोण होता है । वह शिक्षण की परम्परागत विधियों से ही सन्तोष प्राप्त नहीं करता , वरन् स्वयं भी प्रयोग द्वारा शिक्षण की नवीन विधियों की खोज करता है ।
4. व्यावसायिक प्रशिक्षण - शिक्षक के लिए यह आवश्यक है कि वह पूर्ण व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त किये हो । प्रभावशाली शिक्षण के लिए केवल विषय का ज्ञाता होना आवश्यक नहीं , वरन् शिक्षण विधियों की जानकारी भी आवश्यक हैं । समस्त व्यवसायों के समान अध्यापन भी एक प्रकार का व्यवसाय है जिसके लिए यथायोग्य प्रविधियों एवं कौशल और प्रणालियों के ज्ञान की आवश्यकता है ।
5. व्यवसाय के प्रति निष्ठा- शिक्षक को अपने व्यवसाय या शिक्षण के प्रति निष्ठा और श्रृद्धा की भावना रखनी चाहिए । उसका कर्त्तव्य है कि वह शिक्षण के कार्य को उदात्त व्यवसाय के रूप में स्वीकार करें , उसे एक व्यापार या मजदूरी मानकर न चले । प्रत्येक शिक्षक को अपने व्यवसाय के प्रति उत्साह और उमंग की भावना रखनी चाहिए ।
6. पाठ्य सहगामी क्रियाओं में रुचि - वर्तमान युग में शिक्षक से केवल यह आशा नहीं की जाती कि वह केवल अध्यापन के कार्य में ही निपुणता प्राप्त करे , वरन् उससे यह आशा भी की जाती है कि वह विद्यालय में आयोजित होने वाली विभिन्न पाठ्य सहगामी नाटक , स्काउटिंग , रेडक्रास तथा वाद - विवाद आदि क्रियाओं में छात्रों का मार्गदर्शन करे , परन्तु इसके लिए आवश्यक है कि उसकी स्वयं की रुचि भी इन क्रियाओं में होनी चाहिए ।

3. शिक्षक के सामाजिक गुण ( Social Qualities of Teacher ) शिक्षक को सामाजिक मधुर सम्बन्धों द्वारा समाज में विश्वास अर्जित करना चाहिए । शिक्षक को उन सामाजिक गुणों को अवश्य ग्रहण करना चाहिए जो कि उसे कक्षा एवं समाज दोनों में सहायता प्रदान करेंगे । इनमें से वह कुछ गुणों को सम्पर्क द्वारा तथा कुछ को प्रशिक्षण द्वारा प्राप्त कर सकता है । ये गुण हैं- सामाजिक चातुर्य , उत्तम निर्णय शक्ति , जीवन के प्रति  आशावादी दृष्टिकोण , परिस्थितियों का सामना करने का साहस , अपनी कमियों को स्वीकार करने की तत्परता एवं मिल - जुलकर कार्य करने की क्षमता आदि ।

4. शिक्षक के नैतिक गुण ( Moral Qualities of Teacher ) एक आदर्श शिक्षक में निम्नलिखित नैतिक गुण होने चाहिए
1. निष्पक्ष एवं न्यायपूर्ण - शिक्षक को निष्पक्ष और न्यायप्रिय होना चाहिए । उसे छात्रों के साथ व्यवहार करने में धनवान , निर्धन या जाति से ऊँच - नीच के आधार पर किसी प्रकार का भेद नहीं करना चाहिये । उसे सभी के साथ निष्पक्ष व्यवहार करना चाहिए । उसे सभी के प्रति न्यायोचित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए । ये गुण उसे अनुशासन स्थापना में अत्यन्त सहायक होंगे ।
2. उच्च चरित्र - शिक्षक उच्च चरित्र के बिना कभी भी छात्रों की दृष्टि में आदर का पात्र नहीं हो सकता । शिक्षक को चाहिए कि वह जैसा कहता है , उसका स्वयं आचरण करे । छात्रों के सम्मुख एक आदर्श चरित्र प्रस्तुत करे ।
3. धैर्य और सहनशीलता - धैर्य और सहनशीलता शिक्षक के परमावश्यक गुण हैं । कक्षा में विभिन्न मानसिक स्तर के छात्र होते हैं - कम बुद्धि , मध्यम बुद्धि और तीव्र बुद्धि ऐसी दशा में उन सबको साथ लेकर चलने में अत्यन्त धैर्य और सहनशीलता की आवश्यकता होती है ।
4. देशभक्ति - शिक्षक में देश - भक्ति की प्रवल भावना होनी चाहिए । उसे अपने देश भक्ति के आदर्श को छात्रों के सम्मुख प्रस्तुत कर उन्हें इसके लिए प्रेरित करना चाहिए ।
5. सहयोग की भावना- किसी भी विद्यालय की प्रगति वहाँ के शिक्षक बन्धुओं के आपसी सहयोग पर निर्भर है । अतएव एक शिक्षक में सहयोग की भावना होना अत्यन्त आवश्यक है । शिक्षक को चाहिए कि वह दैनिक कार्य तथा पाठ्येत्तर क्रियाओं में अपने साथियों तथा प्रधानाध्यापक को पूर्ण सहयोग प्रदान करे ।