मानसिक रूप से पिछड़ापन या मन्द - बुद्धिपन क्या है ? क्या आप इसका कारण बता सकते हैं ? विस्तार से दीजिये । What is Mental Retardation or Dullness ? Can you Account for it ? Write fully . अथवा मन्दबुद्धि बालक किसे कहते हैं ? ऐसे बालक को शिक्षा देने के लिये अध्यापक में कौनसे विशेष गुण होने चाहिये ? Who is called a Mentally Retarded Child ? What special qualities should a teacher possess to teach such children ?

 मानसिक रूप से पिछड़ापन या मन्द - बुद्धिपन क्या है ? क्या आप इसका कारण बता सकते हैं ? विस्तार से  दीजिये । What is Mental Retardation or Dullness ? Can you Account for it ? Write fully . अथवा मन्दबुद्धि बालक किसे कहते हैं ? ऐसे बालक को शिक्षा देने के लिये अध्यापक में कौनसे विशेष गुण होने चाहिये ? Who is called a Mentally Retarded Child ? What special qualities should a teacher possess to teach such children ? 

मानसिक पिछड़ापन  ( Mental Retardation ) मानसिक पिछड़ापन का अर्थ ( Meaning of Mental Retardation ) कुछ बालक विशेष रुप कसे कम बुद्धि के होते हैं । वे मानसिक रूप से इतने उप सामान्य ( Sub - normal ) होते हैं कि कक्षा में अध्यापक द्वारा दिये गये निर्देशन को सुगमता से समझ नहीं पाते । टरमन ( Terman ) के अनुसार 70 से कम बुद्धि - लुब्धि वाले मानसिक • रूप से विकलांग बालक कहलाते हैं ।  ऐसे बालकों की सीमित बुद्धि होने के कारण वे समाज में अपने आपको समायोजित लिए यह जानना आवश्यक है कि मानसिक पिछड़ापन क्या है ? नहीं कर पाते । इनकी ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती हैं । इनके समायोजन के मानसिक रूप से पिछड़ेपन या मंदबुद्धिपन से अभिप्राय उन बालकों से हैं जो किसी भी शारीरिक तथा मानसिक रोग के कारण मंद बुद्धि का प्रदर्शन करते हैं और अपनी आयु के स्तर के अनुसार किसी भी कार्य को करने में असमर्थ होते हैं । इस दोष के कारण इनमें कई प्रकार की हीन - ग्रन्थियाँ ( Inferiority Complex ) पैदा हो जाती हैं । ऐसे बालक हर तरफ से उपेक्षित रहते हैं । मानसिक रूप से पिछड़े बालकों को बुद्धि - लब्धि के आधार पर वर्गीकृत किया जाता हैं । 70 से 80 के बीच बुद्धि - लब्धि ( I.Q. ) वाले बालक इस वर्ग में आते हैं । बुद्धि - लब्धि के आधार पर किया हुआ उपरोक्त वर्गीकरण सभी के द्वारा तय किया हुआ वर्गीकरण नहीं हैं । बुद्धि - लब्धि की सीमायें विभिन्न विद्वानों के अनुसार विभिन्न हैं लेकिन सभी इस बात से सहमत हैं कि इन बालकों का बौद्धिक अथवा मानसिक विकास सामान्य में बालकों की तुलना में बहुत कम होता हैं । ये वालक मानसिक क्रियाओं में सामान्य बालको की बराबरी कभी नहीं कर सकते । अमेरिकन एसोसियेशन ऑफ मेंटल डेफीशियेन्सी ( AMD ) ने मानसिक रूप से मंदित बालक की परिभाषा इस प्रकार दी है- " मानसिक मंदन मुख्य रूप से औसत से कम बौद्धिक कार्य निष्पादन का संकेत देती है जो कि अनुकूलन व्यवहार सम्बन्धी दोषों के साथ साथ ही पाई जाती है और जो कि विकास काल के समय स्फुट होती हैं ।

 " टर्नबुल ने इस परिभाषा में दो मुख्य लक्षणों की ओर ध्यान दिलाया है-

 ( 1 ) उन बौद्धिक कृत्यों की सीमाओं की पहचान कर लेना जैसे कि उनका संकेत सीखने में कठिनाइयों से मिलाया है तथा 

( 2 ) अनुकूल कुशलताओं पर ध्यान केन्द्रित कर लेना जैसे कि सम्प्रेषण , अपनी देखभाल तथा सामाजिक योग्यता । ये लक्षण स्पष्ट कर देते हैं कि मंदिमता को सहायक सेवाओं की आवश्यकता है ताकि वह अपनी कुछ सीमाओं पर विजय प्राप्त कर सके । साथ ही , अपनी वर्तमान आवश्यकताओं की भी पूर्ति कर सकें । 

कुप्पूस्वामी के शब्दों में— “ शैक्षिक पिछड़ापन अनेक कारणों का परिणाम है । अधिगम में मन्दता उत्पन्न करने के लिये अनेक कारक एक साथ मिल जाते हैं । 

" पोलक व पोलक ने लिखा है- “ मन्द - बुद्धि वालक को अब क्षीण - बुद्धि बालक के समूह में नहीं रखा जाता है , जिनके लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता । अब हम यह स्वीकार करते हैं कि उनके व्यक्तित्व के उतने ही विभिन्न पहलू होते हैं जितने सामान्य बालकों के व्यक्तित्व के होते हैं । " 


मानसिक पिछड़ेपन या मंद बुद्धिपन की विशेषतायें ( Characteristics of Mental Retardation or Dullness ) मंद बुद्धिपन या मानसिक रूप से पिछड़े वालकों की मुख्य विशेषतायें निम्नलिखित 

( 1 ) ऐसे बालक सामान्य बालकों की अपेक्षा धीरे - धीरे विकसित होते हैं । उदाहरणार्थ , छ : वर्ष की आयु के मानसिक रूप से पिछड़े बालक का स्तर तीन या चार साल वाले सामान्य बच्चे के स्तर जितना होगा । परिणामस्वरूप उसका स्कूल जाना भी देर से ही होगा ।

 ( 2 ) स्कूलों में उसका अधिगम ( Learning ) बहुत धीमा होगा । 

( 3 ) निरुत्साहित और परेशान होने के कारण बालक में स्कूल के लिए अरुचि ( Disliking ) का विकास होना स्वाभाविक है ।

 ( 4 ) स्कूल की शिक्षा की कमी के परिणामस्वरूप उसका सामाजिक और संवेगात्मक कुसमायोजन हो जाता है ।

 ( 5 ) शारीरिक रूप भी हीन होता है ( Physical Inferiority ) 

( 6 ) निरन्तर अस्वस्थता ( Constant III - health )

 ( 7 ) संवेगात्मक अस्थिरता का होना ( Emotional Instability ) 

( 8 ) अपूर्ण और दोषपूर्ण शब्दावली ( Imperfect and Defective Vocabulary ) 

( 9 ) सीमित और साधारण रुचियाँ ( Limited and Simple Interests )

 ( 10 ) लघु अवधान - विस्तार ( Short Attention Span )

 ( 11 ) धीमी प्रतिक्रियायें ( Slow Reactions )

 ( 12 ) सामान्यीकरण करने सम्बन्धी अयोग्यता ( Inability to Generalize ) 

( 13 ) मौलिकता का अभाव ( Lack of Originality ) 

( 14 ) प्रयोग की दोषपूर्ण आदतें ( Poor Habits of Application 

 ( 15 ) अनैतिकता और अपराध की ओर झुकीव ( Inclination Towards Immorality and Delinquency ) ā

 मानसिक पिछड़ेपन या मंद बुद्धिपन के कारण ( Causes of Mental Retardation or Dullness ) 

मानसिक पिछड़ेपन या मंद बुद्धिपन का कोई एक ही कारण नही होता । यह दोष कई कारणों की प्रक्रियाओं से उत्पन्न होता है । मानसिक पिछड़ेपन के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी कारकों का वर्णन निम्नलिखित हैं 

( 1 ) वंशानुक्रम ( Heredity ) 

( 2 ) शारीरिक कारक ( Physiological Factors )

 ( 3 ) संवेगात्मक कारक ( Emotional Factors )

 ( 4 ) समाजशास्त्रीय कारक ( Sociological Factors ) 


1. वंशानुक्रम ( Heredity ) - यह विचार सदा ही लोकप्रिय रहा है कि मानसिक पिछड़ेपन का मुख्य कारण वंशानुक्रम ही हैं । इस पिछड़ेपन का मुख्य भाग बालकों को उनके माता - पिता के मानसिक पिछड़ेपन से मिलता है । वृद्धिहीनता पूर्वजों में भी होती है और इसका हस्तांतरण बच्चों में भी हो जाता है । इसका कारण गुणसूत्रों ( Chromosomes ) का दोष होता हैं । 


2. शारीरिक कारक ( Physiological Factors ) - मस्तिष्क में कमियों के आ जाने से मानसिक दोष आ सकता है । इसके अतिरिक्त मस्तिष्क कोशिकाओं को बुखार के कारण घाव लगना भी शारीरिक कारकों में शामिल होता है । कई और बीमारियाँ , जैसे मैनिनजाईटिस ( Meningitiis ) , एनसिफलाईटिस ( Encephalitis ) , कनजिनियल सिफलिस ( Congenial Syplis ) , जर्मन मीसलस ( German Measals ) आदि भी मानसिक पिछड़ेपन के लिए उत्तरदायी हो सकते हैं । इसके अतिरिक्त , ऐपीलैप्सी ( Epilepsy ) , अधरंग ( Paralysis ) , एपोप्लैक्सी ( Apopoexy ) आदि बीमारियाँ भी इस दोष को जन्म देती हैं ।  इन बीमारियों के अतिरिक्त गर्भावस्था के दौरान मां की उप - सामान्य स्थिति चोट , असंतुलन भोजन और कम भोजन के कारण भी मन्द बुद्धिपन जन्म लेता हैं । ( Subnormal Condition ) , जन्म के समय कोई दुर्घटना होना , शैशव काल में सिर पर 

3. संवेगात्मक कारक ( Emotional Factors ) - मानसिक पिछड़ेपन का शैक्षणिक | उपलब्धि का पक्ष गहरे संवेगात्मक कारकों के कारण होता हैं । संवेगो पर नियन्त्रण न कर पाने पर मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है और बालक कहीं भी समायोजन नहीं कर पाते । 

4. समाजशास्त्रीय कारक ( Sociological Factors ) - कुछ समाज - शास्त्रियों का मत है कि मानसिक पिछड़ापन परिवार की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के परिणामस्वरूप होता है । उपरोक्त कारकों में से कोई भी कारक मानसिक पिछड़ेपन या मन्द बुद्धिपन को उत्पन्न करने के लिए क्रियाशील ( Active ) हो सकता है । ऐसे बालकों का इलाज सम्भव नहीं होता क्योंकि इस प्रकार के पिछड़ेपन के प्रभाव स्थायी होते हैं । शिक्षा के रूप में इन बालकों को उनके समायोजन के लिये उचित प्रशिक्षण दिया जा सकता है । 


मानसिक रूप से पिछड़े बालकों की समस्यायें ( Problems of Mentally Retarded Children ) मानसिक रूप से पिछड़े बालकों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता इनके स्कूल अथवा समाज में समायोजन के लिए इनकी समस्याओं पर ध्यान देने की अति आवश्यकता है । इनकी मुख्य समस्यायें निम्नलिखित हैं ।

1. समायोजन सम्बन्धी समस्यायें ( Adjustment Problems ) - जैसा कि पहले बताया जा चुका है ऐसे बालक सामान्य बालकों के बीच स्वयं को कुसमायोजित ( Maladjusted ) महसूस करते हैं । समाज , स्कूल तथा समुदाय में इनका समायोजन कठिन होता है । परिवार में समायोजन ( Adjustment at Home ) - माता - पिता को स्वीकार करने से कतराते हैं कि उनका बच्चा मंद बुद्धि है । स्कूल में उसे असफलता का सामना करना पड़ता है । उधर माता - पिता ऊंची - ऊंची आशायें वांधे रहते हैं । लेकिन बच्चों की असफलता के कारण उनकी आशायें मिट जाती हैं और वे सारा क्रोध बच्चों पर निकालते हैं । उन्हें बुरा - भला कहते हैं । घर पर दूसरे सदस्यों की निगाह में भी वह मंद बुद्धि बालक गिर सा जाता है । स्कूल में समायोजन की समस्या ( Adjustment in School ) - स्कूलों और कक्षाओं में भी अध्यापक का व्यवहार ऐसे बालकों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण नहीं रहता । साधारण बालकों की तरह वे सामान्य शिक्षण विधियों से कुछ भी सीख नहीं पाते । सामान्य वालकों से पिछड़ेपन पर अध्यापक उन्हें डांटते हैं और दंड देते हैं । स्कूल की अन्य गतिविधियों में भाग लेने के लिए उन्हें प्रेरित नहीं किया जाता । परिणामस्वरूप ऐसे बच्चों के मन में स्कूल के प्रति और अध्यापक के प्रति घृणा उत्पन्न हो जाती है । समाज में समायोजन ( Adjustment in Society ) - मंद बुद्धि बालकों से समाज के अन्य वर्ग के लोग और बच्चे मेल - जोल बढ़ाना पसन्द नहीं करते । इसका परिणाम यह होता है कि मंद बुद्धि बालकों में हीनता की भावना पैदा हो जाती है और समाज में वे स्वयं को समायोजित नहीं कर पाते ।

 2. संवेगात्मक समस्यायें ( Emotional Problem ) - घर , स्कूल और समाज में संवेगात्मक रूप से ये अपरिपक्व और अविकसित रह जाते हैं । उदाहरणार्थ , छोटी - छोटी बात उचित वातावरण न मिलने के कारण ऐसे बालकों को संवेगात्मक , प्रशिक्षण नहीं मिल पाता । पर डल जाना या रो पड़ना । संवेगात्मक अस्थिरता ( Emotional Unstability ) के कारण उनका कहीं भी समायोजन ठीक प्रकार से नहीं हो पाता है ।

 3. शारीरिक और मानसिक विकास की समस्या ( Physiological and Mental Development Problem ) - इन बालकों का क्योंकि शारीरिक और मानसिक विकास सामान्य बालकों की तरह नहीं हो पाता जिससे दिनचर्या सम्बन्धी कई क्रियाओं में इनका समायोजन नहीं हो पाता , जैसे - ठीक प्रकार से न बैठ पाना , कम सुनना , आंखों में दोष आ जाना आदि । उपरोक्त समस्याओं की ओर अध्यापक और माता - पिता को अवश्य ध्यान देना चाहिये ताकि ऐसे मंद बुद्धि बालकों का समाज में उचित समायोजन हो सके और वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें ।


 मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम और उपचार ( Preventive and Remedial Measures ) मानसिक पिछड़ेपन की रोकथाम के लिए कई तरीके सुझाये पाये गये हैं । इसको रोकथाम के मुख्य उपाय निम्नलिखित हैं 

( 1 ) पृथक्करण ( Segregation ) 

( 2 ) जन्म दर पर नियन्त्रण ( Birth Control )

 ( 3 ) शिक्षा योजना ( Educational Programme )


 1. पृथक्करण ( Segregation ) - इस प्रक्रिया के अन्तर्गत मानसिक रूप से पिछड़े बालकों को सामान्य बालकों से अलग कर दिया जाये और उन्हें विशेष संस्थाओं में रखा जाये । 

2. जन्म दर पर नियन्त्रण ( Birth Control ) - नसबन्दी के अन्तर्गत गम्भीर रूप से मानसिक रूप से पिछड़े माता - पिता की नसबन्दी कर देनी चाहिए ताकि मानसिक रूप से पिछड़े बच्चों का जन्म ही न हो पाये । .

3. शिक्षा योजना ( Educational Programme ) - इसके अन्तर्गत निम्नलिखित कार्य किये जा सकते हैं

 ( i ) व्यक्तिगत ध्यान ( Individual Attention ) - अध्यापक ऐसे बच्चों की ओर विशेष ध्यान देने के लिए तत्पर रहें । इसके लिए कक्षाओं का छोटा होना आवश्यक है । पिछड़ेपन के लिए माता - पिता को शिक्षित करना अति आवश्यक है । उन्हें उनके बच्चे के 

( ii ) माता - पिता को शिक्षित करना ( Education of Parents ) - मानसिक बुद्धि के स्तर से अवगत करवाना चाहिए । इसके लिए उन्हें बताया जाना चाहिये कि वे ऐसे बालकों के साथ कैसा व्यवहार करें । 

( iii ) विशेष स्कूल और अस्पताल ( Special Schools and Hospitals ) - इस प्रकार के बालकों के लिये विशेष स्कूलों और अस्पतालों की व्यवस्था होनी चाहिये ।  

( iv ) विशेष शिक्षण विधियाँ ( Special Teaching Methods ) - मंद स्कूलों और अस्पतालों में इनकी देख - रेख और आवश्यक प्रशिक्षण सम्भव नहीं होता । बालकों के लिए सामान्य शिक्षण विधियाँ सफल नहीं हो सकतीं । अतः इनके लिये विशेष शिक्षण विधियों का प्रयोग करना अति आवश्यक है ।

 ( v ) विशेष पाठ्यक्रम ( Special Curriculum ) - इन बालकों के लिए विशेष पाठ्यक्रम होना चाहिये । सामान्य पाठ्यक्रम इनकी मानसिक योग्यताओं के अनुकूल नहीं होता । • हस्तकलाओं पर अधिक बल देना चाहिये । पुस्तकीय अध्ययन में ये अधिक उन्नति नहीं । कर सकते । हस्त कलाओं के प्रशिक्षण से ये समाज पर बोझ नहीं बन सकते । मानसिक पिछड़ेपन के अध्ययन से यह बात तो स्पष्ट है कि इन बालकों की चिकित्सा करना आसान कार्य नहीं है । साथ ही , उन्हें सामान्य बालकों के समान भी नहीं बनाया जा सकता । लेकिन हाँ , इनके लिए शिक्षण के कार्यक्रम इस प्रकार से अवश्य नियोजित किये जा सकते हैं कि ये बालक समाज में किसी पर बोझ न बनकर पैरों पर खड़ा होना सीख जायें  ।